एआईएडीएमके के पूर्व समन्वयक और पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पनीरसेल्वम का डीएमके में शामिल होना उनकी राजनीतिक यात्रा की गाथा को दर्शाता है, जिसमें वे अपने निर्णयों के कारण अलग-थलग रह गए। लगभग पांच दशक तक एआईएडीएमके में रहने के बाद, जुलाई 2022 में उनके पार्टी से निष्कासन ने उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर कर दिया।
जब पनीरसेल्वम ने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की उपस्थिति में डीएमके जॉइन किया, तो उनके साथ केवल एक विधायक, पी. अय्यप्पन ही थे। उनके निष्कासन के समय, पनीरसेल्वम को दो प्रमुख नेताओं – आर. वैथिलिंगम और पी.एच. मनोज पंडियन – का समर्थन प्राप्त था, जो हाल ही में डीएमके में शामिल हुए।
उनका यह बदलाव न केवल उनके राजनीतिक करियर की जटिलताओं को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे लंबे समय तक पार्टी में प्रभावी रहकर भी व्यक्तिगत फैसलों और परिस्थितियों के कारण एक नेता राजनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ सकता है।
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पनीरसेल्वम का अनुभव यह संकेत देता है कि राजनीतिक निर्णयों का प्रभाव सिर्फ वर्तमान पद और समर्थन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि भविष्य में गठित संबंधों और अवसरों पर भी गहरा असर डालता है।
इस घटना से तमिलनाडु की राजनीति में सत्ता और नेतृत्व के समीकरणों पर भी असर पड़ रहा है, जबकि उनके कदम ने डीएमके को भी मजबूती प्रदान की है।
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