ओडिशा के एक परिवार के लिए पिछले कुछ महीने अनिश्चितता और डर से भरे रहे हैं। परिवार का दावा है कि उसके 14 परिजनों को बांग्लादेशी होने के संदेह में हिरासत में लेकर निर्वासित कर दिया गया, लेकिन आज तक उन्हें यह नहीं पता कि वे सभी कहां हैं, क्या वे एक साथ हैं या सीमा के दोनों ओर अलग-अलग कर दिए गए हैं।
शेख रबानी के परिवार के 14 सदस्यों को नवंबर 2025 में पकड़ा गया था। परिवार का कहना है कि दशकों से उनकी जड़ें ओडिशा में हैं, फिर भी उन्हें अवैध बांग्लादेशी प्रवासी मानते हुए बांग्लादेश भेज दिया गया। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या बांग्लादेश ने उन्हें वापस भेज दिया और भारत ने उन्हें फिर से निर्वासित कर दिया? क्या इस प्रक्रिया में परिवार के सदस्य एक-दूसरे से बिछड़ गए?
परिवार के अनुसार, 14 में से नौ लोग करीब पखवाड़े भर पहले तक संपर्क में थे, लेकिन उसके बाद से उनकी कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। इस अनिश्चितता के बीच, परिवार अब अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहा है, ताकि अपने परिजनों का पता लगाया जा सके और उनके नागरिक अधिकारों की रक्षा हो सके।
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शेख रबानी ओडिशा के तटीय केंद्रपाड़ा जिले के चपली गांव के निवासी हैं। उनका कहना है कि उनके पास अपने परिवार की नागरिकता और निवास से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं, इसके बावजूद प्रशासन की कार्रवाई ने पूरे परिवार को संकट में डाल दिया है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब राज्य सरकार बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ अभियान चला रही है। मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी के अनुसार, 1 दिसंबर तक 50 कथित अवैध प्रवासियों को निर्वासित किया जा चुका है। लेकिन रबानी परिवार का कहना है कि इस अभियान में निर्दोष लोगों को भी निशाना बनाया जा रहा है।
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