मध्य पूर्व में अमेरिका-इज़राइल के संयुक्त हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद वैश्विक बाजारों में भारी उथल-पुथल के संकेत मिल रहे हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में करीब 8% तक उछाल आ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध प्रीमियम के कारण एमसीएक्स पर मार्च डिलीवरी वाला क्रूड ऑयल शुक्रवार के ₹6,100 के बंद स्तर से बढ़कर करीब ₹6,588 तक पहुंच सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 67 डॉलर प्रति बैरल, ब्रेंट 72 डॉलर से अधिक और मुरबन क्रूड 74 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है। फरवरी महीने में ही ब्रेंट में 8% की तेजी दर्ज की गई थी। यदि ईरान-इज़राइल संघर्ष लंबा खिंचता है, तो कीमतें 80 से 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जिससे वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका है।
भारत के लिए स्थिति चिंताजनक है क्योंकि देश अपनी कच्चे तेल की जरूरत का करीब 90% आयात करता है, जिसमें आधा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। यदि ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर देता है, जहां से दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति गुजरती है, तो आपूर्ति बाधित हो सकती है। इससे पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, हवाई ईंधन और रोजमर्रा की हजारों वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ेगा। कच्चे तेल से 6,000 से अधिक उत्पाद बनते हैं, जिनमें प्लास्टिक, पॉलिएस्टर, दवाइयों के उपकरण, सौंदर्य प्रसाधन और डामर शामिल हैं।
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भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशक शेयर बाजार से निकलकर सोना और चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। अनुमान है कि एमसीएक्स पर सोने में 5% और चांदी में 7-8% तक तेजी आ सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तेल कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होती है, तो भारत में महंगाई, व्यापार घाटा और आर्थिक विकास पर दबाव बढ़ेगा। ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण की जरूरत और भी अहम हो गई है।
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