लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि वे कानून निर्माण की प्रक्रिया में अधिक प्रभावी और निर्णायक भूमिका निभा सकें। उन्होंने यह बात गोवा में आयोजित कॉमनवेल्थ पार्लियामेंटरी एसोसिएशन (सीपीए) इंडिया रीजन जोन VII सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कही।
अपने संबोधन में ओम बिरला ने कहा कि महिलाएं आज व्यवसाय, शिक्षा, विज्ञान और अन्य सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। ऐसे में यह स्वाभाविक है कि उनकी भूमिका विधायी संस्थानों में भी बढ़नी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था तभी अधिक मजबूत बनती है जब समाज के सभी वर्गों की समान भागीदारी सुनिश्चित की जाती है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी न केवल संसद और विधानसभाओं को अधिक प्रभावी बनाएगी, बल्कि इससे नीतियों में अधिक संवेदनशीलता और संतुलन भी आएगा। उन्होंने यह भी कहा कि महिला नेतृत्व ने कई देशों में सकारात्मक बदलाव लाए हैं और भारत भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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सीपीए सम्मेलन में विभिन्न राज्यों और देशों के प्रतिनिधियों ने संसदीय कार्यप्रणाली को और अधिक समावेशी बनाने पर विचार-विमर्श किया। सम्मेलन का उद्देश्य लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करना और विधायी प्रक्रियाओं में सुधार लाना था।
ओम बिरला ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में भारत की संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी और प्रभाव दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि यह न केवल लोकतंत्र के लिए बल्कि सामाजिक विकास के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।
उनके इस बयान को महिला सशक्तिकरण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
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