जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस के रुख से खुद को और नेशनल कॉन्फ्रेंस को अलग कर लिया है। उन्होंने कहा कि सभी आधिकारिक सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत का गायन संवैधानिक दायित्व है और इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यदि भविष्य में कांग्रेस सत्ता में लौटती है और संसद के जरिए मौजूदा प्रावधान को बदलना चाहती है, तो नेशनल कॉन्फ्रेंस उसका समर्थन करेगी। हालांकि, उन्होंने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि जब संसद में इससे संबंधित विधेयक पेश किया गया था, तब पार्टी को इसका विरोध करना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि कानून अब लागू हो चुका है। ऐसे सरकारी कार्यक्रमों में जहां राज्यपाल, उपराज्यपाल और उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जैसे संवैधानिक पदाधिकारी मौजूद हों, वहां राष्ट्रगान बजाया जाना स्वाभाविक है। कानून के तहत जहां राष्ट्रगान बजाया जाता है, वहां वंदे मातरम् को लेकर निर्धारित नियमों का पालन भी अनिवार्य हो गया है।
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उमर ने स्पष्ट किया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने पार्टी के तौर पर कभी वंदे मातरम् को स्वीकार नहीं किया, लेकिन सरकार को संवैधानिक दायित्वों का पालन करना होगा।
कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में वंदे मातरम् के पूरे संस्करण के गायन के बाद दोनों दलों के बीच मतभेद सामने आए हैं। कार्यक्रम में उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला मौजूद थे।
कांग्रेस ने नेशनल कॉन्फ्रेंस से 1937 के कांग्रेस कार्यसमिति प्रस्ताव का सम्मान करने को कहा, जिसमें वंदे मातरम् की पहली दो पंक्तियां गाने की बात कही गई थी। वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस नेताओं का कहना है कि पार्टी विचारधारा को सरकारी प्रोटोकॉल से अलग रखना चाहिए और किसी को वंदे मातरम् गाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
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