जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने देश में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) से ज्यादा बड़ा खतरा मतदाताओं के नाम हटाए जाने की प्रक्रिया है, जो लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान यदि मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, तो यह बेहद चिंताजनक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर एक वोट की रक्षा करना जरूरी है और इस प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना अनिवार्य है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र की मजबूती इस बात पर निर्भर करती है कि प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदान का अधिकार मिले। अगर किसी कारणवश लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाते हैं, तो इससे चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
और पढ़ें: मंत्रियों और गरीबों के बच्चों को साथ पढ़ाने का प्रस्ताव, बिहार में शिक्षा सुधार पर जोर
इसी बीच, फारूक अब्दुल्ला ने भी राजनीतिक मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने विपक्षी दल पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) पर आरोप लगाया कि उसने राज्यसभा चुनाव में उनकी पार्टी का समर्थन नहीं किया।
नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी के बीच यह बयानबाजी जम्मू-कश्मीर की राजनीति में बढ़ते तनाव को दर्शाती है। ऐसे समय में जब चुनावी प्रक्रियाओं की निष्पक्षता पर चर्चा हो रही है, राजनीतिक दलों के बीच मतभेद और आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं।
उमर अब्दुल्ला के इस बयान ने चुनावी पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनाव आयोग इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है और आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
और पढ़ें: ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर ट्रंप की सख्त चेतावनी, युद्ध के आलोचकों को बताया देशद्रोही