पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी से पहले भारतीय सेना ने एक सशक्त संदेश जारी करते हुए देश की एकजुटता और संकल्प को दोहराया है। सेना ने कहा, “जब मानवता की सीमाएं पार होती हैं, तो जवाब निर्णायक होता है। न्याय हो चुका है। भारत एकजुट खड़ा है।”
यह हमला 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के पहलगाम के पास स्थित बैसरन घास के मैदान में हुआ था, जिसे “मिनी स्विट्जरलैंड” भी कहा जाता है। आतंकवादियों ने पर्यटकों को निशाना बनाते हुए 25 लोगों की हत्या कर दी थी, जिनमें एक स्थानीय पोनी संचालक भी शामिल था। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था और क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
हमले के बाद एहतियात के तौर पर जम्मू-कश्मीर के करीब 44 पर्यटन स्थलों को बंद कर दिया गया था। हालांकि अब अधिकांश स्थानों को फिर से खोल दिया गया है, लेकिन बैसरन और चंदनवारी जैसे प्रमुख स्थल अभी भी पर्यटकों के लिए बंद हैं। इनके दोबारा खुलने की कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं बताई गई है।
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बरसी के मद्देनजर कश्मीर घाटी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सुरक्षा बल पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी संभावित खतरे को रोकने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। वरिष्ठ अधिकारी लगातार बैठकों के जरिए स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
पुलवामा, अवंतीपोरा और श्रीनगर सहित कई जिलों में उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठकें आयोजित की गई हैं। पुलवामा में डीआईजी जावेद इकबाल मट्टू ने अपराध और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की, जबकि श्रीनगर में एसएसपी जी.वी. संदीप चक्रवर्ती ने कानून-व्यवस्था पर चर्चा की। इन बैठकों में आतंकवाद-रोधी रणनीतियों, खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान और एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
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