संसद के मानसून सत्र में सोमवार को केंद्र सरकार ने पेपर लीक से जुड़े अपराधों पर सख्ती बढ़ाने के लिए लोकसभा में संशोधन विधेयक पेश किया। विपक्ष के हंगामे के बीच केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन का प्रस्ताव सदन में रखा।
प्रस्तावित विधेयक में पेपर लीक जैसे अपराधों के लिए अधिक कठोर सजा का प्रावधान किया गया है। इसके तहत ऐसे मामलों में अधिकतम सजा को बढ़ाकर 10 साल तक की कैद करने और अधिकतम जुर्माने की राशि बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है। सरकार इस विधेयक को चर्चा और पारित कराने के लिए भी आगे बढ़ा सकती है।
हालांकि, संसद में विधेयक पेश किए जाने के दौरान विपक्षी दलों ने जोरदार विरोध किया। कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्ष नीट पेपर लीक मामले को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने कथित रूप से बल प्रयोग किया।
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विपक्ष की मांग है कि प्रदर्शनकारियों पर कथित कार्रवाई के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जवाब दें। विपक्षी दलों ने छात्रों के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से माफी की मांग भी की है।
यदि सरकार और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध समाप्त होता है, तो संसद के दोनों सदनों में पेपर लीक मुद्दे पर तीखी बहस होने की संभावना है। सरकार जहां परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए नए प्रावधानों को जरूरी बता रही है, वहीं विपक्ष इसे छात्रों से जुड़े गंभीर मुद्दों से जोड़ रहा है।
गौरतलब है कि मानसून सत्र का पहला सप्ताह लगातार हंगामे की भेंट चढ़ गया था। विपक्षी दलों ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में चल रहे पेपर लीक विरोधी आंदोलन का समर्थन करते हुए संसद के अंदर और बाहर प्रदर्शन किए थे। इसके कारण दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई और अधिकांश समय कामकाज नहीं हो सका।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध खत्म होता है या संसद में हंगामा आगे भी जारी रहता है।
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