कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपीलों पर सवाल उठाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पूछा कि अगर देश के लोग लगातार त्याग करते रहें तो सरकार की भूमिका और जिम्मेदारी क्या रह जाती है।
पवन खेड़ा ने कहा कि चुनाव अभियान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार देश को विभिन्न विषयों पर सलाह दे रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री लोगों से कई तरह की बचत और संयम की अपील कर रहे हैं, जिनमें उर्वरक का कम उपयोग, ईंधन की खपत घटाना, सोने की खरीद सीमित करना और विदेशी यात्राओं पर नियंत्रण जैसे मुद्दे शामिल हैं।
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पवन खेड़ा ने कहा कि इन सभी अपीलों का बोझ अंततः आम जनता पर ही पड़ता है, जबकि सरकार की जिम्मेदारी नीतियों को संतुलित तरीके से लागू करना है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि देश के नागरिक लगातार अपने जीवन स्तर और जरूरतों में कटौती करते जाएं, तो सरकार की ओर से विकास और सुविधा बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि जनता से बार-बार त्याग की अपेक्षा करना एकतरफा दृष्टिकोण हो सकता है, जिसे लेकर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है।
उन्होंने सरकार की आर्थिक और सामाजिक नीतियों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से सवाल खड़े किए और कहा कि विकास का लाभ सभी वर्गों तक समान रूप से पहुंचना चाहिए।
पवन खेड़ा के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। भाजपा की ओर से इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी बयानबाजी देखने को मिल सकती है।
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