केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को भारत के मुक्त व्यापार समझौतों यानी एफटीए का अधिकतम लाभ उठाने के लिए देशव्यापी अभियान चलाने का आह्वान किया। उन्होंने राज्यों, उद्योग संगठनों और निर्यातकों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि एफटीए के तहत मिलने वाली तरजीही बाजार पहुंच का लाभ देश के हर जिले में कारोबारियों तक पहुंचे।
नई दिल्ली में “एफटीए का लाभ उठाना: एक आउटरीच कार्यक्रम” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि भारत के मौजूदा नौ एफटीए ऐसी अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ते हैं, जिनका कुल सकल घरेलू उत्पाद लगभग 60 लाख करोड़ डॉलर है। इन समझौतों के माध्यम से भारत को वैश्विक व्यापार के करीब दो-तिहाई हिस्से तक तरजीही पहुंच प्राप्त होती है।
उन्होंने कहा कि आगामी व्यापार समझौतों और बाजार पहुंच बढ़ाने के प्रयासों से भारतीय निर्यातकों की पहुंच वैश्विक व्यापार के लगभग 75 प्रतिशत हिस्से तक हो सकती है। इससे भारतीय उत्पादों को प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम शुल्क दरों का लाभ मिलने की संभावना है।
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गोयल ने एफटीए जागरूकता अभियान को देश के सभी 780 जिलों तक पहुंचाने पर जोर दिया। इसमें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, व्यापारियों, उद्यमियों, स्टार्टअप और महिला उद्यमियों को शामिल करने की अपील की गई। उन्होंने कहा कि व्यापार समझौतों को केवल दस्तावेजों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें वास्तविक निर्यात अवसरों में बदलना जरूरी है, खासकर पहली बार निर्यात करने वाले कारोबारियों और छोटे उद्यमों के लिए।
एक लाख करोड़ डॉलर के निर्यात का लक्ष्य
गोयल ने कहा कि भारत ने चालू वर्ष में एक लाख करोड़ डॉलर के निर्यात का लक्ष्य निर्धारित किया है, जो लगभग 16 प्रतिशत वृद्धि के बराबर है। अप्रैल से जुलाई के बीच भारत का निर्यात करीब 317 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह लगभग 280 अरब डॉलर था। इस तरह करीब 36-37 अरब डॉलर की वृद्धि हुई है।
उन्होंने पहली तिमाही में भारत की 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद देश ने मजबूत आर्थिक गति बनाए रखी है। उन्होंने कारोबारियों से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की उपस्थिति लगातार बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।
सरकार उत्पादों की विविधता बढ़ाने, नए निर्यातकों को प्रोत्साहित करने और छोटे निर्यातकों को अपना कारोबार बढ़ाने में मदद देने के प्रयास जारी रखेगी।
एफटीए से नए बाजारों तक पहुंच
गोयल ने बताया कि मॉरीशस, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के साथ एफटीए पहले से लागू हैं। अन्य साझेदारों के साथ हुए समझौते भी धीरे-धीरे लागू होने की दिशा में हैं।
भारत कनाडा, मेक्सिको, चिली, मर्कोसुर, दक्षिण अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ, खाड़ी सहयोग परिषद और इजरायल के साथ भी बेहतर बाजार पहुंच हासिल करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके अलावा आसियान, दक्षिण कोरिया और जापान के साथ मौजूदा व्यापार व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा रही है।
गोयल ने कहा कि एफटीए का उद्देश्य केवल कम शुल्क हासिल करना नहीं है, बल्कि भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी देशों के कारोबारियों के मुकाबले वास्तविक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देना है। उन्होंने कपड़ा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले भारतीय निर्यातकों को बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा में नुकसान होता था, क्योंकि उन्हें तरजीही बाजार पहुंच हासिल थी।
अब कई विकसित बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी शुल्क दरें मिलने के बाद भारतीय निर्यातकों को उत्पादन का पैमाना बढ़ाने, गुणवत्ता सुधारने, समय पर आपूर्ति करने और ग्राहकों का भरोसा कायम करने पर ध्यान देना चाहिए।
एमएसएमई और नए निर्यातकों पर विशेष ध्यान
मंत्री ने वाणिज्य विभाग, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग, अन्य मंत्रालयों, निर्यात संवर्धन परिषदों, उद्योग संगठनों और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई।
उन्होंने निर्यात संवर्धन परिषदों और उद्योग संगठनों से जमीनी स्तर पर पहुंच बढ़ाने तथा एफटीए के लाभों की जानकारी स्थानीय भाषाओं और सरल प्रारूप में उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
गोयल ने ई-कॉमर्स को एमएसएमई और पहली बार निर्यात करने वाले कारोबारियों के लिए वैश्विक बाजार में प्रवेश का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने क्षेत्रवार और औद्योगिक क्लस्टर स्तर की अधिक कार्यशालाएं आयोजित करने तथा देश के विभिन्न हिस्सों के कारोबारियों की अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रतिनिधिमंडलों में भागीदारी बढ़ाने की जरूरत बताई।
निर्यातकों को मिलेगा अतिरिक्त सहयोग
गोयल ने निर्यात संवर्धन मिशन के तहत नियामकीय मंजूरी, स्वच्छता एवं पादप-स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं, तकनीकी व्यापार बाधाओं और कठिन भौगोलिक क्षेत्रों के निर्यातकों के लिए माल ढुलाई सहायता जैसे मुद्दों पर नए सुझाव मांगे।
उन्होंने पूर्वोत्तर, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे क्षेत्रों के निर्यातकों के लिए विशेष सहयोग की जरूरत बताई। साथ ही, परिवहन मार्गों में व्यवधान और बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत से प्रभावित छोटे निर्यातकों के लिए भी मजबूत सहायता की मांग की।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित 100 भव्य पार्कों में निर्यातकों को प्राथमिकता के आधार पर सहायता दी जाएगी। अधिक निर्यात का लक्ष्य रखने वाली इकाइयों को रियायतें और तैयार उपयोग योग्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान होगा। मौजूदा औद्योगिक क्लस्टरों और औद्योगिक पार्कों को भी निर्यात संवर्धन मिशन के माध्यम से समर्थन दिया जाएगा।
2030 तक दो लाख करोड़ डॉलर निर्यात का लक्ष्य
गोयल ने कहा कि महामारी, भू-राजनीतिक संघर्षों और वैश्विक व्यवधानों के बावजूद भारत को 2030 तक दो लाख करोड़ डॉलर के निर्यात का दीर्घकालिक लक्ष्य बनाए रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कम लक्ष्य तय करने से देश के आर्थिक परिवर्तन के लिए जरूरी रोजगार, विदेशी मुद्रा आय और उद्यमिता के अवसर पर्याप्त मात्रा में पैदा नहीं होंगे। भारत को विश्वसनीय वैश्विक साझेदार बनने का लक्ष्य रखना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके निर्यातित उत्पाद अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरें और उनसे बेहतर प्रदर्शन करें।
उन्होंने तकनीकी तथा स्वच्छता मानकों के महत्व पर भी जोर दिया। साथ ही कहा कि भारतीय उत्पादों में वास्तविक मूल्य होना चाहिए और मूल देश प्रमाणन की विश्वसनीयता बनाए रखना आवश्यक है।
गोयल के अनुसार, लगातार चलने वाला देशव्यापी प्रयास लाखों रोजगार पैदा कर सकता है, विदेशी मुद्रा आय बढ़ा सकता है और नई पीढ़ी के उद्यमियों को निर्यात क्षेत्र में आने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है। इससे 2047 तक भारत को विकसित अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को भी गति मिलेगी।
केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय
कार्यशाला में केंद्र सरकार, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के अधिकारियों, निर्यात संवर्धन परिषदों तथा उद्योग संगठनों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य भारत के व्यापार समझौतों से पैदा होने वाले क्षेत्रवार और औद्योगिक क्लस्टर आधारित अवसरों की पहचान करना था।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य सभी संबंधित पक्षों को एक मंच पर लाकर राज्यों के उद्योगों के लिए एफटीए से पैदा होने वाले विशिष्ट अवसरों की जानकारी साझा करना है।
सत्रों में निर्यात क्लस्टरों और उत्पादों की पहचान, एफटीए के लाभ लेने में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों तथा केंद्र सरकार से आवश्यक आगे की सहायता पर चर्चा की गई।
वाणिज्य विभाग के अनुसार, यह पहल केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है कि भारत के एफटीए का लाभ जिला और क्लस्टर स्तर तक निर्माताओं तथा निर्यातकों को मिल सके।
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