प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि पिछले एक दशक से अधिक समय में भारत का बदलाव यह साबित करता है कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करना संभव ही नहीं, बल्कि निश्चित भी है। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने भारत की आर्थिक प्रगति और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एक समय वैश्विक संस्थाओं ने भारत को दुनिया की ‘फ्रैजाइल फाइव’ अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया था, लेकिन 12 वर्षों के भीतर भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन गया है। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों का संकल्प देश की तेज विकास यात्रा की सबसे बड़ी ताकत है और सामूहिक इच्छाशक्ति के सामने कोई बाधा टिक नहीं सकती।
उन्होंने कहा कि आजादी के समय देश ने अनेक सपने देखे थे, लेकिन लंबे समय तक विकास की गति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी। वर्ष 2014 तक भारत को कमजोर अर्थव्यवस्थाओं की श्रेणी में रखा गया था। इसके बाद देश ने नई गति हासिल की और तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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2047 तक विकसित भारत का संकल्प
प्रधानमंत्री ने सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पाइप से पानी की आपूर्ति का विस्तार, करोड़ों परिवारों को रसोई गैस कनेक्शन और बड़े पैमाने पर शौचालयों का निर्माण जैसे कार्यक्रमों ने आम लोगों के जीवन में बदलाव लाया है।
मोदी ने देश की कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था में आधुनिक बदलावों की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत 21वीं सदी में पिछली सदी के कानूनों और व्यवस्थाओं के सहारे आगे नहीं बढ़ सकता। बदलते समय के अनुसार व्यवस्थाओं में सुधार जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की उपलब्धियों ने देश के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों में विश्वास मजबूत किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि विकसित भारत 2047 का संकल्प अधूरा नहीं रहेगा।
मोदी ने भारत की विशाल युवा और जनसंख्या शक्ति को भी देश की बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि जब दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश विकसित राष्ट्र बनने का संकल्प लेता है, तो दुनिया का नजरिया भी भारत के प्रति बदलता है।
उन्होंने कहा कि भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत, मजबूत होता बुनियादी ढांचा और वैश्विक स्तर पर बढ़ता प्रभाव देशवासियों के आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। साथ ही उन्होंने आत्मनिर्भर भारत को विकास यात्रा की प्रमुख प्राथमिकता बनाए रखने पर जोर दिया।
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