प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन से इतर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से मुलाकात की। पश्चिम एशिया में इस साल शुरू हुए युद्ध के बाद दोनों नेताओं की यह पहली आमने-सामने मुलाकात है।
यह बैठक ऐसे समय हुई है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बनी हुई है।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान के बीच इससे पहले कई बार टेलीफोन पर बातचीत हो चुकी है। 30 जून को हुई बातचीत में पेज़ेश्कियान ने मोदी को पश्चिम एशिया के हालात और आगे की स्थिति से अवगत कराया था। प्रधानमंत्री ने उस दौरान भारत के रुख को दोहराते हुए कहा था कि सभी मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए किया जाना चाहिए। उन्होंने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता तथा ऊर्जा और व्यापार के निर्बाध आवागमन की आवश्यकता पर भी जोर दिया था।
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बिश्केक में हुई ताजा मुलाकात में दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय घटनाक्रम के साथ-साथ भारत-ईरान द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की संभावना है। चाबहार बंदरगाह, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और मध्य एशिया तक संपर्क जैसे मुद्दे दोनों देशों के संबंधों में महत्वपूर्ण हैं। भारत के लिए ईरान मध्य एशिया तक पहुंच के लिहाज से भी रणनीतिक महत्व रखता है।
एससीओ सम्मेलन में नरेंद्र मोदी, पेज़ेश्कियान के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग समेत कई प्रमुख नेता भाग ले रहे हैं। सम्मेलन के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और सदस्य देशों के बीच सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है।
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