पश्चिम बंगाल के उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद गहरा गया है। चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश जारी कर पार्टी के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल से रोक दिया है। इस फैसले पर कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है।
राहुल गांधी ने कहा कि पहले शिवसेना, फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और अब तृणमूल कांग्रेस के मामले में एक जैसा पैटर्न दिखाई दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग मिलकर पार्टियों को विभाजित कर रहे हैं और फिर उनका चुनाव चिन्ह छीन लिया जाता है।
राहुल गांधी ने इसे ‘‘वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी’’ बताते हुए कहा कि चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है, लेकिन उनके अनुसार आयोग उन ताकतों की मदद कर रहा है जो जनता के फैसले को पलटती हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल ममता बनर्जी की लड़ाई नहीं, बल्कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहने वाले हर राजनीतिक दल और मतदाता की लड़ाई है। ये राहुल गांधी के आरोप हैं और इन्हें उनके राजनीतिक बयान के रूप में देखा जाना चाहिए।
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चुनाव आयोग ने क्यों लिया अंतरिम फैसला?
चुनाव आयोग के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस में दो प्रतिद्वंद्वी गुट सामने आए हैं। एक का नेतृत्व ममता बनर्जी और दूसरे का नेतृत्व अरूप रॉय कर रहे हैं। दोनों ही खुद को पार्टी का वास्तविक प्रतिनिधि बता रहे हैं। आयोग ने कहा कि इस विवाद पर निर्वाचन प्रतीक (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के पैराग्राफ 15 के तहत विस्तृत निर्णय जरूरी है।
उपचुनाव से पहले अंतिम फैसला करने के लिए समय कम होने के कारण आयोग ने फिलहाल दोनों गुटों को अलग नाम और अलग चुनाव चिन्ह के साथ चुनाव लड़ने का निर्देश दिया है। दोनों पक्षों से 18 सितंबर की सुबह तक तीन-तीन पसंदीदा नाम और मुक्त चुनाव चिन्हों के विकल्प मांगे गए थे।
उपचुनाव तक लागू रहेगा अंतरिम आदेश
आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था अंतिम निर्णय होने तक लागू रहेगी। पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों के मद्देनजर दोनों गुटों को अलग राजनीतिक पहचान के साथ मैदान में उतरना होगा।
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