रेल मंत्रालय ने देशभर में रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने, भीड़भाड़ कम करने और सुरक्षा मजबूत करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण रेल अवसंरचना परियोजनाओं को मंजूरी दी है। सोमवार को जारी बयान के अनुसार ये परियोजनाएं दक्षिण रेलवे, उत्तर रेलवे और दक्षिण पूर्व रेलवे क्षेत्रों में लागू की जाएंगी। इनमें लाइन डबलिंग, तीसरी और चौथी लाइन का निर्माण, बाईपास कॉरिडोर और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम शामिल हैं।
दक्षिण पूर्व रेलवे के तहत झारखंड में बरबेंदा–दमरुघुटु डबलिंग और दमरुघुटु–बोकारो स्टील सिटी तीसरी व चौथी लाइन परियोजना को क्षमता विस्तार की दिशा में अहम कदम बताया गया है। यह मार्ग भारत के ऊर्जा, खनिज और सीमेंट कॉरिडोर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्तमान में यह लाइन 108% उपयोग क्षमता पर चल रही है, जहां ट्रेनों को 90 से 150 मिनट तक रुकना पड़ता है। इस सेक्शन से रोजाना 78 ट्रेनें गुजरती हैं, जिनमें 38 यात्री और 40 मालगाड़ियां शामिल हैं।
सुरक्षा के लिहाज से उत्तर रेलवे के 34 स्टेशनों पर 421.41 करोड़ रुपये की लागत से इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाने की मंजूरी दी गई है। इसमें दिल्ली मंडल के 21 और अंबाला मंडल के 13 स्टेशन शामिल हैं। यह कवच प्रणाली के साथ मिलकर रेल संचालन को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाएगा।
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राजपुरा बाईपास (13.46 किमी) को 411.96 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी मिली है, जिससे अंबाला–जालंधर सेक्शन पर भीड़भाड़ कम होगी। इसके अलावा केरल में अलप्पुझा–अंबालापुझा और तमिलनाडु में इरुगुर–पोडानूर लाइन डबलिंग परियोजनाएं भी स्वीकृत हुई हैं।
पालक्काड टाउन–पारली बाईपास से इंजन रिवर्सल की जरूरत खत्म होगी, जिससे यात्री ट्रेनों में 40–44 मिनट और मालगाड़ियों में 120 मिनट तक की बचत होगी। इन परियोजनाओं से ट्रेन संचालन तेज, सुरक्षित और अधिक समयबद्ध बनने की उम्मीद है।
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