राजस्थान के दूरदराज और जनजातीय बहुल क्षेत्रों के समावेशी विकास के लिए वर्ष 2026-27 के तहत 196.39 करोड़ रुपये के बजट प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। यह स्वीकृति बुधवार, 29 जुलाई 2026 को राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति की बैठक में दी गई।
ये प्रस्ताव भारतीय संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत मंजूर किए गए हैं। इस अनुच्छेद के अंतर्गत अनुसूचित जनजातियों के कल्याण और उनके विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत की संचित निधि से राज्यों को हर साल अनुदान दिया जाता है।
राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने जनजातीय कल्याण से जुड़ी राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्र विकास विभाग की योजनाओं को केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार तेजी से लागू किया जाएगा।
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मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकास कार्यों की गुणवत्ता और समय पर पूरा होने की लगातार निगरानी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों द्वारा नियमित क्षेत्रीय दौरे किए जाने चाहिए, ताकि जमीनी स्तर पर काम की प्रगति की सही जानकारी मिल सके।
राज्य सरकार का उद्देश्य जनजातीय समुदायों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और उनके सामाजिक एवं आर्थिक विकास को गति देना है। स्वीकृत बजट का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और अन्य कल्याणकारी योजनाओं को मजबूत करने में किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप योजनाओं को लागू करने से राजस्थान के जनजातीय क्षेत्रों में विकास की गति बढ़ेगी और स्थानीय लोगों को अधिक लाभ मिलेगा। सरकार ने संबंधित विभागों को परियोजनाओं की प्रभावी निगरानी और पारदर्शी तरीके से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
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