केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र केवल एक भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा और सामरिक शक्ति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पूरा क्षेत्र भारत की रणनीतिक नियति का अभिन्न हिस्सा है, जहां सीमाएं, नदियां और संस्कृति गहराई से एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं।
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि जब हम पूर्व की बात करते हैं, तो हम केवल मानचित्र के एक हिस्से की चर्चा नहीं कर रहे होते, बल्कि एक ऐसे जीवंत क्षेत्र की बात कर रहे होते हैं जहां इतिहास, भूगोल और संस्कृति एक साथ मिलकर भारत की पहचान को मजबूत करते हैं।
उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र भारत की सुरक्षा दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण है, और सरकार इस क्षेत्र के विकास और सुरक्षा दोनों को समान प्राथमिकता दे रही है। रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचे का विकास, कनेक्टिविटी और सामाजिक-आर्थिक प्रगति को तेज गति से आगे बढ़ाया जा रहा है।
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उन्होंने जोर देकर कहा कि मजबूत पूर्वोत्तर ही मजबूत भारत की नींव है, और केंद्र सरकार इस क्षेत्र को देश की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार कार्य कर रही है। सड़क, रेल और हवाई संपर्क को बेहतर बनाकर इस क्षेत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सक्षम बनाया जा रहा है।
राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक विविधता उसकी सबसे बड़ी ताकत है, जिसे संरक्षित और प्रोत्साहित करना आवश्यक है। सरकार का लक्ष्य है कि यह क्षेत्र न केवल विकास के मामले में आगे बढ़े, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा में भी अपनी अहम भूमिका निभाता रहे।
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