अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित दान चोरी मामले की जांच एसआईटी रिपोर्ट के बाद तेज हो गई है। प्रशासन और पुलिस ने कई बड़े कदम उठाए हैं, जिसमें लंबे समय से तैनात रेडियो मेंटेनेंस ऑफिसर (आरएमओ) अर्जुन देव का 17 साल बाद गोरखपुर तबादला भी शामिल है। इसके साथ ही गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को 14 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
अर्जुन देव वर्ष 2009 से अयोध्या में तैनात थे और मंदिर परिसर में लगे लगभग 1600 सीसीटीवी कैमरों की निगरानी सहित सुरक्षा व्यवस्था और वायरलेस संचार प्रणाली की जिम्मेदारी संभालते थे। एसआईटी रिपोर्ट के बाद उनके कार्यों को लेकर सवाल उठे हैं। रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि उन्होंने अपने आधिकारिक कार्यों के अलावा मंदिर प्रबंधन और वीआईपी दर्शन व्यवस्था जैसे मामलों में भी भूमिका निभाई।
सूत्रों के अनुसार, अर्जुन देव के कुछ पदाधिकारियों से करीबी संबंधों के कारण उनके तबादले कई बार रोके गए थे। लेकिन जांच रिपोर्ट के बाद अब उन्हें गोरखपुर स्थानांतरित कर दिया गया है।
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जांच अब केवल मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और आठ गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है। लगभग 70 से 80 लोग जांच के दायरे में आ चुके हैं और उनसे पूछताछ के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
पुलिस ने एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक सहित छह बैंकों को नोटिस जारी कर दान राशि से जुड़े लेनदेन और कर्मचारियों की जानकारी मांगी है। बैंक के दो कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच हो रही है, जिन्हें दान गणना की निगरानी के लिए तैनात किया गया था।
जांचकर्ताओं को शक है कि आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन से व्हाट्सएप चैट डिलीट की हैं, इसलिए सभी आठ मोबाइल फोन फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे जाएंगे।
छापेमारी में पुलिस को जमीन के कागजात, बैंक पासबुक, सोने-चांदी के जेवर और अन्य दस्तावेज मिले हैं। अब जांच यह भी देख रही है कि क्या यह संपत्ति मंदिर दान से जुड़े पैसों से बनाई गई है।
इसके साथ ही ट्रस्ट दान व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है, जिसमें क्यूआर कोड से दान, नकद बॉक्सों की संख्या कम करना और सोना-चांदी सरकारी टकसाल को सौंपने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।
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