अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष चंपत राय ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सूत्रों के अनुसार, यह फैसला राम मंदिर में श्रद्धालुओं के दान की कथित चोरी और गबन मामले में उत्तर प्रदेश स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) द्वारा आठ लोगों की गिरफ्तारी के बाद लिया गया। ट्रस्ट के प्रमुख सदस्य अनिल मिश्रा ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
एसआईटी की प्रारंभिक जांच में दान राशि के संग्रह, लेखा-जोखा और निगरानी व्यवस्था में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। जांच के आधार पर इस मामले में पहली एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने दर्ज कराई, जिन्हें सितंबर 2025 में पूर्व ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद ट्रस्ट में शामिल किया गया था।
भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, टिन्नू यादव, मनीष यादव सहित कई अन्य लोगों के नाम शामिल हैं। इन पर मंदिर की दान राशि की गिनती और प्रबंधन में अनियमितताओं का आरोप है।
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इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देवरिया में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि दान चोरी में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि एसआईटी की सिफारिशों के आधार पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है और आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। उन्होंने विपक्ष पर भी अयोध्या की छवि खराब करने और राम भक्तों की भावनाओं को आहत करने की राजनीति करने का आरोप लगाया।
एसआईटी की जांच में सामने आया है कि दान की गिनती के दौरान कुछ कर्मचारी नोटों के बंडलों में अतिरिक्त नोट जोड़कर बैंक रिकॉर्ड से राशि का मिलान कर देते थे। बाद में बैंक में जमा करने से पहले वे अतिरिक्त नोट निकालकर अपने पास रख लेते थे। जांच में दान कक्ष में लगाए गए गुप्त कैमरों की फुटेज भी अहम साक्ष्य बनी है। फुटेज में कुछ कर्मचारी सीसीटीवी के ब्लाइंड स्पॉट का फायदा उठाकर नोट छिपाते हुए दिखाई देने का दावा किया गया है।
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