स्वयंभू धर्मगुरु रामपाल को 2014 के हरियाणा हिंसा मामले में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद जेल से रिहा कर दिया गया। वह पिछले 11 वर्षों से अधिक समय से जेल में बंद थे। रिहाई के समय रामपाल के परिवार के सदस्य और उनके वकील जेल परिसर में मौजूद रहे।
हरियाणा के हिसार जिले की अदालत ने 25 सितंबर 2025 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ रामपाल ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। 8 अप्रैल को उच्च न्यायालय की खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति गुरविंदर सिंह गिल और न्यायमूर्ति रमा कुमारी शामिल थीं, ने उनकी जमानत मंजूर कर ली।
अदालत ने जमानत देते हुए रामपाल को यह निर्देश दिया कि वे किसी भी प्रकार की “भीड़ मानसिकता” (mob mentality) को बढ़ावा न दें और ऐसे किसी भी धार्मिक या सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल न हों, जहां शांति भंग होने की संभावना हो।
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वर्ष 2014 में हिसार के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम में पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। एफआईआर के अनुसार, रामपाल और उनके 900 से अधिक समर्थकों ने गिरफ्तारी का विरोध किया था। इस दौरान कुछ समर्थकों के हथियारबंद होने और महिलाओं एवं बच्चों को ढाल के रूप में उपयोग करने के आरोप भी लगे थे।
रामपाल पर हत्या के प्रयास, राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने और गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) सहित कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।
उनके वकील ने अदालत में दलील दी कि रामपाल की उम्र 75 वर्ष है और सह-आरोपियों में से कई को पहले ही जमानत मिल चुकी है। साथ ही यह भी बताया गया कि 425 गवाहों में से केवल 58 की ही अब तक गवाही पूरी हुई है, जिससे मुकदमे के जल्द खत्म होने की संभावना नहीं है।
अदालत ने लंबी हिरासत और मुकदमे की धीमी गति को देखते हुए उन्हें नियमित जमानत पर रिहा करने का निर्णय लिया।
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