अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक अहम घटनाक्रम के तहत रूस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को 1 अरब अमेरिकी डॉलर देने की घोषणा की है। खास बात यह है कि रूस ने यह फैसला ट्रंप के औपचारिक निमंत्रण को स्वीकार करने से पहले ही लिया है। यह राशि उन रूसी परिसंपत्तियों से दी जाएगी, जो पश्चिमी देशों में प्रतिबंधों के कारण जमी (फ्रोजन) हुई हैं।
रूसी पक्ष का कहना है कि यह योगदान वैश्विक शांति, स्थिरता और संघर्ष से प्रभावित क्षेत्रों में समाधान की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। हालांकि, मॉस्को ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का स्थायी सदस्य बनेगा या नहीं। इस कदम को कई विश्लेषक रूस की ओर से एक रणनीतिक संदेश के रूप में देख रहे हैं, जिसके जरिए वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी भूमिका को रचनात्मक और प्रभावी दिखाना चाहता है।
इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को अधिग्रहित करने की जोरदार मांग पर भी रूस की प्रतिक्रिया सामने आई है। ट्रंप की इस मांग से डेनमार्क की स्थिति संवेदनशील हो सकती है और इससे नाटो (NATO) की एकता पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है।
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इस मुद्दे पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि उन्हें ट्रंप की ग्रीनलैंड संबंधी मांग से कोई चिंता नहीं है। पुतिन के अनुसार, यह मामला अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच का है और रूस इसमें हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं समझता।
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लेकर रूस का यह वित्तीय योगदान भविष्य में वैश्विक शक्ति संतुलन और कूटनीतिक संबंधों को प्रभावित कर सकता है।
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