सुप्रीम कोर्ट ने मेट्रो परियोजना में हो रही देरी को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि क्या राज्य सरकार के लिए त्योहार विकास कार्यों से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं।
यह मामला मेट्रो निर्माण कार्य में बार-बार हो रही देरी से जुड़ा है, जिसमें राज्य सरकार की ओर से त्योहारों और अन्य कारणों का हवाला दिया गया था। इस पर नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सार्वजनिक परियोजनाओं को अनावश्यक रूप से रोका नहीं जा सकता।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि बुनियादी ढांचा परियोजनाएं आम जनता की सुविधा और विकास के लिए होती हैं, ऐसे में इन्हें प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर हर बार त्योहारों के नाम पर काम रोका जाएगा, तो परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पाएंगी।
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सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा और यह स्पष्ट करने को कहा कि आखिर किन परिस्थितियों में परियोजना में देरी हो रही है। साथ ही अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
मेट्रो परियोजना शहर के यातायात को सुगम बनाने और प्रदूषण कम करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके पूरा होने से लाखों लोगों को रोजाना आने-जाने में राहत मिलने की उम्मीद है।
अदालत की इस टिप्पणी को विकास कार्यों में देरी को लेकर एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अब यह देखना होगा कि पश्चिम बंगाल सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और परियोजना को जल्द पूरा करने के लिए क्या रणनीति अपनाती है।
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