सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ताओं को गुवाहाटी हाईकोर्ट का रुख करने को कहा। अदालत ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट की अधिकारिता को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
तीन जजों की पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली शामिल थे, ने कहा कि यह एक “चिंताजनक प्रवृत्ति” बन गई है कि हर मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट में लाया जा रहा है। अदालत ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 226 नागरिकों को निकटतम हाईकोर्ट में जाने का अधिकार देता है।
याचिकाएं एक वायरल वीडियो को लेकर दायर की गई थीं, जिसमें सरमा कथित रूप से एक विशेष समुदाय के लोगों की ओर राइफल से निशाना साधते और गोली चलाते दिखाई दे रहे थे। यह वीडियो भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की असम इकाई द्वारा सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किया गया था। विवाद बढ़ने के बाद वीडियो हटा लिया गया।
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वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंहवी ने अनुच्छेद 14, 15 और 21 के तहत मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का हवाला देते हुए विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच की मांग की। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने “सुविधा के लिए मंच चयन” यानी फोरम शॉपिंग के खिलाफ चेतावनी दी और कहा कि शीर्ष अदालत हर राजनीतिक रूप से संवेदनशील विवाद का मंच नहीं बन सकती।
अदालत ने यह भी कहा कि यदि हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलती, तो याचिकाकर्ता बाद में सुप्रीम कोर्ट आ सकते हैं। साथ ही, गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मामले की शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया।
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