सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) द्वारा प्रस्तावित ऑडिट पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई तक, यानी 15 जुलाई तक, यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।
मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क अदालत के समक्ष रखे। सभी दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि इस विवाद के समाधान के लिए 6 अगस्त 2025 को दिए गए अपने पूर्व फैसले की व्याख्या करना आवश्यक होगा। अदालत ने माना कि वर्तमान विवाद उसी निर्णय की कानूनी व्याख्या से जुड़ा हुआ है।
इसी आधार पर शीर्ष अदालत ने फिलहाल सीएजी ऑडिट की प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए संबंधित पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक कोई भी पक्ष ऐसा कदम न उठाए जिससे मामले की स्थिति प्रभावित हो।
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यह मामला दिल्ली की निजी बिजली वितरण कंपनियों के ऑडिट को लेकर लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद से जुड़ा है। ऑडिट के अधिकार और उसके दायरे को लेकर विभिन्न पक्षों के बीच मतभेद रहे हैं, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट अंतिम कानूनी स्थिति स्पष्ट करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले में उठाए गए कानूनी प्रश्न महत्वपूर्ण हैं और इन पर विस्तार से विचार किए जाने की आवश्यकता है। इसलिए फिलहाल किसी भी प्रकार की कार्रवाई पर रोक लगाना उचित होगा।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को होगी। उस दिन अदालत यह तय करेगी कि सीएजी ऑडिट को आगे बढ़ाया जाए या नहीं तथा 6 अगस्त 2025 के फैसले की व्याख्या के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया क्या होगी।
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