भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को चार कारोबारी सत्रों से जारी तेजी पर विराम लग गया। निवेशकों ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति के फैसले से पहले सतर्क रुख अपनाया, जिसके चलते प्रमुख शेयर सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। आरबीआई की नीति घोषणा बुधवार को होनी है, इसलिए बाजार में निवेशकों ने नई खरीदारी से दूरी बनाए रखी।
कारोबार के अंत में सेंसेक्स 210.08 अंक यानी 0.27 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,428.95 अंक पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 159.40 अंक यानी 0.64 प्रतिशत फिसलकर 24,614.90 अंक पर आ गया।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी पूरे दिन धीरे-धीरे नीचे की ओर खिसकता रहा और कारोबार के दौरान 24,428 के निचले स्तर तक पहुंच गया। हालांकि निचले स्तरों से कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन खरीदारी का उत्साह सीमित रहा। 24,500 का स्तर तत्काल प्रतिरोध क्षेत्र के रूप में उभरा, जहां बिकवाली का दबाव दिखाई दिया।
और पढ़ें: वैश्विक संकेतों के बीच शेयर बाजार की मिली-जुली शुरुआत, सेंसेक्स मजबूत तो निफ्टी फिसला
विश्लेषकों का कहना है कि 24,400 का स्तर फिलहाल मजबूत समर्थन क्षेत्र बना हुआ है। यदि निफ्टी लगातार इस स्तर से नीचे बना रहता है, तो मुनाफावसूली तेज हो सकती है और सूचकांक 24,300 तक फिसल सकता है।
बाजार में बैंकिंग, वित्तीय और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली, जिससे निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। निफ्टी के प्रमुख कमजोर शेयरों में ग्रासिम इंडस्ट्रीज़, एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी और हिंदुस्तान यूनिलीवर शामिल रहे।
क्षेत्रीय सूचकांकों में सबसे अधिक दबाव रियल्टी सेक्टर पर रहा। निफ्टी रियल्टी सूचकांक 2 प्रतिशत से अधिक टूट गया और दिन का सबसे कमजोर सेक्टोरल सूचकांक रहा। इसके अलावा निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी बैंक भी लाल निशान में बंद हुए।
व्यापक बाजार की बात करें तो निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 0.29 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक 0.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। पिछले चार दिनों की मजबूत तेजी के बाद निवेशकों ने आरबीआई के ब्याज दर संबंधी फैसले, महंगाई और आर्थिक वृद्धि पर केंद्रीय बैंक की टिप्पणी का इंतजार करना उचित समझा। इसी कारण बाजार में सतर्कता और सीमित कारोबार का माहौल देखने को मिला।
और पढ़ें: सेंसेक्स 544 अंक चढ़ा, निफ्टी 24,774 पर बंद; कच्चे तेल में गिरावट और एफआईआई निवेश से बाजार में तेजी