महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा द्वारा मुंबई के प्रतिष्ठित केईएम अस्पताल के नाम से “किंग एडवर्ड” शब्द हटाने की मांग पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने रविवार (25 जनवरी 2026) को इस मांग पर सवाल उठाते हुए इसे दोहरे मापदंड का उदाहरण बताया।
संजय राउत ने कहा कि यदि औपनिवेशिक दौर से जुड़े नामों को हटाने की बात की जा रही है, तो पहले उन निजी परियोजनाओं पर भी नजर डालनी चाहिए, जिनमें विदेशी नामों का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने विशेष रूप से वर्ली में स्थित “लोढ़ा ट्रंप टावर” का उल्लेख करते हुए कहा कि यह इमारत खुद मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा के समूह द्वारा विकसित की गई है।
राउत ने तंज कसते हुए कहा कि एक ओर सरकार और उसके मंत्री ब्रिटिश शासन से जुड़े नामों को हटाने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रियल एस्टेट परियोजनाओं में विदेशी नामों को ब्रांडिंग के लिए खुले तौर पर अपनाया जा रहा है। उन्होंने पूछा कि यदि “किंग एडवर्ड” नाम आपत्तिजनक है, तो फिर “ट्रंप” जैसे नामों का इस्तेमाल क्यों स्वीकार्य है।
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केईएम अस्पताल, जिसे आधिकारिक तौर पर किंग एडवर्ड मेमोरियल अस्पताल के नाम से जाना जाता है, मुंबई का एक विश्व प्रसिद्ध सार्वजनिक अस्पताल है। यह न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश से आने वाले गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र है।
शिवसेना (यूबीटी) ने इस मुद्दे को केवल नाम बदलने तक सीमित न रखते हुए सरकार की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि सरकार को नाम बदलने की राजनीति के बजाय स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, बुनियादी ढांचे और मरीजों की सुविधाओं पर ध्यान देना चाहिए।
इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर नामकरण और पहचान से जुड़े मुद्दों पर बहस तेज हो गई है।
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