मतदाता सूची के सत्यापन और अद्यतन के लिए शुरू किया गया निर्वाचन आयोग का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान मध्य प्रदेश में दो असाधारण और विपरीत मानवीय कहानियों का कारण बन गया। एक ओर 22 साल बाद एक मां अपने लापता बेटे से मिली, तो दूसरी ओर इसी प्रक्रिया के चलते 100 से अधिक संगीन मामलों में वांछित एक कुख्यात अपराधी पुलिस के हत्थे चढ़ गया।
पश्चिमी मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में खिलचीपुरा गांव निवासी 45 वर्षीय विनोद गयारी वर्ष 2003 में परिवार की इच्छा के विरुद्ध विवाह कर घर छोड़कर चले गए थे। वर्षों तक कोई जानकारी न मिलने पर परिवार ने उन्हें मृत मान लिया था। पिता का निधन हो चुका था और वृद्ध मां व मानसिक रूप से अस्वस्थ बड़े भाई गांव में रह गए थे। वर्ष 2026 में एसआईआर प्रक्रिया के तहत जब विनोद ने राजस्थान के नागौर जिले से अपना मतदाता पहचान पत्र अपडेट कराने के लिए पैतृक गांव की मतदाता सूची से माता-पिता का विवरण मांगा, तो ग्राम पंचायत ने उनकी मां को इसकी सूचना दी। इसके बाद पुलिस की मदद से विनोद का पता चला और 22 साल बाद मां-बेटे का भावुक मिलन हुआ।
विनोद वर्तमान में नागौर में एक स्कूल में चपरासी के रूप में कार्यरत हैं और पत्नी व दो बच्चों के साथ रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें कभी उम्मीद नहीं थी कि एक मतदाता सत्यापन अभियान उन्हें फिर से परिवार से मिला देगा।
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इसी एसआईआर प्रक्रिया ने इंदौर में एक और बड़ा खुलासा किया। 54 वर्षीय अब्दुल राशिद उर्फ तलवार सिंह, जो मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में चोरी, डकैती, हत्या और हत्या के प्रयास जैसे करीब 100 मामलों में आरोपी है, वर्षों बाद एसआईआर फॉर्म भरने के लिए इंदौर लौटा। इसके बाद उसने एक चोरी की वारदात को अंजाम दिया, जिससे पुलिस को उसका सुराग मिला और वह गिरफ्तार हो गया। पुलिस ने उसके पास से साढ़े सात लाख रुपये से अधिक का चोरी का सामान बरामद किया।
एसआईआर अभियान के तहत अब तक मध्य प्रदेश में लाखों नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं। यह अभियान जहां मतदाता रिकॉर्ड को शुद्ध करने के लिए शुरू हुआ था, वहीं इसने टूटे परिवारों को जोड़ने और लंबे समय से फरार अपराधियों को कानून के शिकंजे में लाने का काम भी किया।
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