केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को इंटरनेशनल टैक्स रिसर्च एंड एनालिसिस फाउंडेशन (आईटीआरएएफ) से स्वतंत्र कर नीति संबंधी शोध को अधिक प्रमुखता देने और उसे सीधे नीति निर्माण तथा सार्वजनिक विमर्श से जोड़ने का आग्रह किया।
बेंगलुरु में आईटीआरएएफ की ओर से आयोजित आठवें अंतरराष्ट्रीय कर सम्मेलन में ‘न्यू एज टैक्सेशन’ विषय पर संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि भारत में कराधान के क्षेत्र में उच्च स्तर की विशेषज्ञता रखने वाले पेशेवरों और विशेषज्ञों की कमी नहीं है। हालांकि, इस विशेषज्ञता को एकजुट करने और नीतिगत विकल्पों में प्रभावी योगदान सुनिश्चित करने के लिए मजबूत संस्थागत मंचों की आवश्यकता है।
सीतारमण ने कहा कि स्वतंत्र कर शोध को केवल विशेषज्ञों और अकादमिक चर्चाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे नीति निर्माण की प्रक्रिया में अधिक स्पष्ट और प्रभावी स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने कर व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर शोध, विश्लेषण और विशेषज्ञ राय को सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया।
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वित्त मंत्री के अनुसार, बदलती अर्थव्यवस्था और नई तकनीकों के दौर में कराधान का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। ऐसे में कर नीतियों को तैयार करते समय विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की जानकारी और अनुभव का बेहतर इस्तेमाल किया जाना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने आईटीआरएएफ जैसे संस्थानों से अपेक्षा जताई कि वे कर नीति पर स्वतंत्र और गुणवत्तापूर्ण शोध को व्यापक स्तर पर सामने लाएं तथा विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और आम जनता के बीच संवाद को मजबूत करें।
सम्मेलन में ‘न्यू एज टैक्सेशन’ के तहत बदलते कर ढांचे, विशेषज्ञता और नीतिगत जरूरतों से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई।
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