दक्षिण दिल्ली के आया नगर इलाके में 30 नवंबर को दिनदहाड़े एक डेयरी मालिक की निर्मम हत्या ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। हमलावरों ने ताबड़तोड़ 69 गोलियां चलाईं और हैरानी की बात यह रही कि पीड़ित द्वारा पहनी गई बुलेटप्रूफ जैकेट भी उसकी जान नहीं बचा सकी। जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस को यह एहसास हुआ कि यह हत्या बदले की भावना से जुड़ी घटनाओं की एक कड़ी थी।
आया नगर गांव, जो गुरुग्राम-दिल्ली सीमा के पास बसा है, संकरी और धूलभरी गलियों के जाल से होकर बाबा मोहल्ला तक पहुंचता है। इसी मोहल्ले में दो ऐसे परिवार रहते हैं जिनका उपनाम एक ही है—लोहिया। लेकिन दोनों परिवारों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति, साथ ही उनकी जिंदगी की कहानी, एक-दूसरे से बिल्कुल अलग नजर आती है।
रतन लोहिया का घर एक साधारण दो मंजिला मकान है। घर के अंदर बड़ा सा बरामदा है, जो चारपाइयों से सजे ड्राइंग रूम में खुलता है। एक दीवार पर लगा बड़ा टीवी बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की लाइव फुटेज दिखाता रहता है। इस घर की खामोशी रतन की पत्नी कमलेश और बेटी दीपिका को जैसे अपने भीतर समेटे हुए है। ऊपर की मंजिल से ही थोड़ी चहल-पहल सुनाई देती है, जहां दीपिका के बच्चे सर्दियों की छुट्टियों में ननिहाल आए हुए हैं और खेल रहे हैं।
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करीब एक किलोमीटर दूर अरुण लोहिया का घर स्थित है, जो किसी आलीशान हवेली से कम नहीं लगता। ऊंची ईंटों और कंटीले तारों से घिरी चारदीवारी के पीछे सफेद रंग के ग्रीक शैली के खंभे झांकते नजर आते हैं। शाम ढलने के बाद भी खिड़कियां अंधेरे में डूबी रहती हैं। घर के बाहर दो पुलिसकर्मी तैनात हैं, जो इस बात का संकेत देते हैं कि यहां कुछ असाधारण और गंभीर घट चुका है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि आया नगर की ये दो हत्याएं आपसी रंजिश और बदले की आग से जुड़ी हैं, जिसने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
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