राज्यसभा की नामित सदस्य सुधा मूर्ति ने बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में सहायता के लिए स्कूलों में काउंसलर नियुक्त करना अनिवार्य करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिन स्कूलों में काउंसलर नहीं होंगे, उनका पंजीकरण रद्द किया जाना चाहिए।
शुक्रवार को राज्यसभा में “बाल यौन अपराधों से संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2024” पर चर्चा के दौरान उन्होंने यह सुझाव दिया। यह निजी सदस्य विधेयक फौजिया खान द्वारा 7 फरवरी 2025 को पेश किया गया था।
सुधा मूर्ति ने कहा कि बचपन में यौन अपराधों के शिकार हुए बच्चों को सबसे ज्यादा इस बात के भरोसे की जरूरत होती है कि “यह तुम्हारी गलती नहीं है।” उन्होंने कहा कि ऐसा भरोसा घर में मां, स्कूल में शिक्षक या प्रशिक्षित काउंसलर दे सकते हैं।
और पढ़ें: चंडीगढ़ में डॉक्टरों की तैनाती पर मनीष तिवारी ने उठाए सवाल, 221 में से 180 डॉक्टर प्रतिनियुक्ति पर होने का दावा
उन्होंने काउंसलर की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों को किसी ऐसे व्यक्ति की जरूरत होती है जिस पर वे भरोसा कर सकें और अपनी बात खुलकर कह सकें। उन्होंने सुझाव दिया कि स्कूलों में छात्रों की संख्या के अनुसार पर्याप्त काउंसलर नियुक्त किए जाएं और यह व्यवस्था ऐसी न हो कि 2,000 छात्रों पर केवल एक काउंसलर हो।
सुधा मूर्ति ने यह भी कहा कि पीओसीएसओ अधिनियम को बैचलर ऑफ एजुकेशन (बी.एड.) के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए ताकि शिक्षक बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों को समझ सकें और समय पर कार्रवाई कर सकें।
चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी के सांसद अशोक कुमार मित्तल ने बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों को रोकने के लिए जागरूकता बढ़ाने और दोषियों को समयबद्ध सजा देने की आवश्यकता बताई। वहीं भारतीय जनता पार्टी की सांसद धर्मशीला गुप्ता ने कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए सरकार पहले ही कई कदम उठा चुकी है।
भाजपा के सांसद घनश्याम तिवारी ने बताया कि बच्चों से जुड़े यौन अपराधों के मामलों की सुनवाई तेज करने के लिए देशभर में 1,023 विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित की गई हैं, जिनमें 412 विशेष पीओसीएसओ अदालतें शामिल हैं।
और पढ़ें: फ्लाइंग स्क्विरल दांव से वायरल हुए रूसी पहलवान बोजिगित इस्लामगेरेएव