सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, 1 अक्टूबर को तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी नेतृत्व वाले गुट की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें पार्टी के चार ऐसे बैंक खातों को संचालित करने की अनुमति मांगी गई थी, जिन पर पश्चिम बंगाल पुलिस ने डेबिट रोक लगा दी थी। इन चार खातों में करीब 804 करोड़ रुपये जमा बताए गए हैं।
न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ ने कहा कि वह कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं है, जिसमें खातों के संचालन की अंतरिम अनुमति देने से इनकार किया गया था।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट से मामले की सुनवाई जल्द पूरी करने का अनुरोध किया। पीठ ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा पार्टी के चुनाव चिह्न को फ्रीज किए जाने के साथ-साथ इन चार बैंक खातों में मौजूद धन पर अधिकार का बड़ा सवाल अभी अदालत के समक्ष विचाराधीन है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी करने से भी इनकार किया।
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मामला एक साइबर अपराध शिकायत के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा चार बैंक खातों को फ्रीज किए जाने से जुड़ा है। यह शिकायत विधायक बिश्वनाथ दास ने दर्ज कराई थी। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी गुट ने दावा किया था कि खातों को फ्रीज करने से संबंधित प्राथमिकी में कानूनी खामियां हैं।
इससे पहले 27 अगस्त को कलकत्ता हाई कोर्ट ने करीब 804 करोड़ रुपये वाले इन खातों को संचालित करने की अंतरिम अनुमति देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा था कि ऐसी अनुमति उसके पहले के आदेश को प्रभावित करेगी, जिसके तहत पार्टी को रोजमर्रा के खर्च चलाने की अनुमति दी गई थी।
9 जुलाई को हाई कोर्ट ने पार्टी के दैनिक खर्चों को मंजूरी देने और भुगतान की व्यवस्था के लिए एक विशेष अधिकारी नियुक्त किया था। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हाई कोर्ट इस मामले की सुनवाई तेजी से करेगा। संबंधित पक्षों को दुर्गा पूजा अवकाश के बाद अपने-अपने हलफनामे दाखिल करने हैं।
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