सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को चुनाव आयोग की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में पारदर्शिता की मांग वाली याचिका पर सुनवाई हुई। यह याचिका राहुल गांधी और विपक्ष के 12 अन्य नेताओं ने दायर की है। अदालत में 10 अक्टूबर को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और लगाई गई पाबंदियों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भी सुनवाई हो रही है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ चुनाव आयोग के एसआईआर संबंधी फैसलों से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग पर विचार कर रही है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, सुनवाई के दौरान अदालत ने विरोध प्रदर्शन के समय राहुल गांधी के आचरण पर भी सवाल उठाए।
एसआईआर से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग
याचिका में चुनाव आयोग से संबंधित पूरी फाइलें, बैठक के एजेंडे, कार्यवाही का विवरण, आधिकारिक टिप्पणियां और चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज आपत्तियों का रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
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इसके अलावा, याचिकाकर्ताओं ने ईसीआईनेट और ईआरओनेट प्रणालियों के एक्सेस लॉग भी मांगे हैं। वे 24 जून 2025 को देशभर में एसआईआर प्रक्रिया शुरू करने के फैसले से संबंधित दस्तावेजों का खुलासा चाहते हैं। याचिकाकर्ताओं का उद्देश्य चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
10 अक्टूबर के प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई का मामला
सुप्रीम कोर्ट में अलग से उन याचिकाओं पर भी विचार किया जा रहा है, जिनमें प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस ज्यादती का आरोप लगाया गया है। इनमें वकीलों को हिरासत में लेने, विपक्षी नेताओं को नजरबंद करने तथा लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
याचिकाओं में मेट्रो और रेल सेवाओं में कथित बाधा, सड़कें बंद किए जाने और इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने पर भी चिंता जताई गई है। इसके अलावा, कथित उल्लंघनों को लेकर केंद्रीय गृह सचिव, पुलिस अधिकारियों और मेट्रो अध्यक्ष के खिलाफ अवमानना याचिकाएं भी दायर की गई हैं।
सुनवाई का केंद्र चुनाव आयोग की पारदर्शिता और विरोध प्रदर्शन के दौरान नागरिक अधिकारों पर लगाए गए कथित प्रतिबंध हैं।
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