राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरद पवार की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने शनिवार को विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी एफसीआरए संशोधन विधेयक, 2026 के मौजूदा स्वरूप का विरोध किया। उन्होंने केंद्र सरकार से विधेयक वापस लेने या इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने की मांग की।
बारामती से लोकसभा सांसद सुले ने कहा कि विदेशी फंडिंग को हमेशा संदेह की नजर से नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा करने का अवसर मिलना चाहिए। संसद के अगले सप्ताह इस विधेयक पर चर्चा और इसे पारित करने की संभावना के बीच उनकी यह मांग सामने आई है।
सुले ने कहा कि भारत में कई विदेशी संस्थाएं वर्षों से सकारात्मक काम कर रही हैं। उन्होंने बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और यूएसएड का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि सरकार हर विदेशी फंड से जुड़े संगठन को संदेह की नजर से क्यों देखे।
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उन्होंने विदेशी फंडिंग की तुलना विदेशों में रहने वाले भारतीयों द्वारा अपने परिवारों को भेजे जाने वाले धन से भी की। सुले के मुताबिक, विदेशी धन का इस्तेमाल भारत में वैध चिकित्सा और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए भी किया जा सकता है।
प्रस्तावित एफसीआरए विधेयक में विदेशी योगदान और उससे जुड़ी संपत्तियों के अधिकार, निगरानी, प्रबंधन और निपटारे के लिए एक नामित प्राधिकरण की व्यापक व्यवस्था का प्रस्ताव है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इससे विदेशी धन के नियमन के बजाय स्वतंत्र संगठनों पर नियंत्रण बढ़ सकता है।
परिसीमन विधेयक पर सुले ने कहा कि अभी टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी, क्योंकि विधेयक संसद में पेश ही नहीं हुआ है।
10 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी से मिलेंगे एनसीपी-एसपी के सांसद
शरद पवार गुट के एनसीपी के सभी आठ सांसद 10 अगस्त को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। इसके लिए प्रधानमंत्री से समय मांगा गया है। सुले ने इसे सांसदों से जुड़ी आधिकारिक बैठक बताया।
हालांकि, बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि संसद में एफसीआरए और संभावित परिसीमन विधेयक जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा चल रही है। एनसीपी-एसपी के संभावित रूप से परिसीमन विधेयक को समर्थन देने की अटकलें भी हैं। सुले ने फिलहाल किसी राजनीतिक गठजोड़ की पुष्टि नहीं की और कहा कि बैठक मुख्य रूप से सांसदों के काम तथा उनके निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रहेगी।
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