तेलंगाना राज्य वित्तीय वर्ष के अंत से पहले अपने राजस्व लक्ष्यों को प्राप्त करने के प्रयासों में जुटा हुआ है। चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के अंत तक राज्य की कुल राजस्व प्राप्ति ₹1.24 लाख करोड़ रही है, जो बजट अनुमान में निर्धारित ₹2.24 लाख करोड़ का 54.38 प्रतिशत है। वित्तीय वर्ष समाप्त होने में अभी तीन महीने शेष हैं, ऐसे में राज्य को निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना होगा।
राज्य सरकार लंबे समय से चली आ रही देनदारियों और उन पर लगने वाले भारी ब्याज भुगतान के बोझ से बाहर निकलने का प्रयास कर रही है। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कुल राजस्व प्राप्ति का आधे से अधिक हिस्सा उधार और अन्य दायित्वों के माध्यम से आया है। इस अवधि के दौरान उधारी और अन्य देनदारियों से प्राप्त राशि ₹65,930 करोड़ रही, जो राज्य की वित्तीय स्थिति के लिए चिंता का विषय मानी जा रही है।
कर राजस्व के मोर्चे पर तेलंगाना का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा है। दिसंबर के अंत तक, यानी तीसरी तिमाही के अंत में, राज्य का कर राजस्व ₹1.13 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो बजट अनुमान में तय ₹1.75 लाख करोड़ का 65.02 प्रतिशत है। इससे यह संकेत मिलता है कि कर संग्रह की स्थिति मजबूत बनी हुई है और आने वाले महीनों में इसमें और सुधार की संभावना है।
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वहीं, गैर-कर राजस्व का प्रदर्शन कमजोर बना हुआ है। तीसरी तिमाही के अंत तक गैर-कर राजस्व केवल ₹7,120 करोड़ रहा, जो इसके लिए निर्धारित ₹31,618 करोड़ के बजट अनुमान का मात्र 22.52 प्रतिशत है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि इस क्षेत्र में अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वित्तीय वर्ष की शेष अवधि में यदि कर संग्रह की गति बनी रहती है और गैर-कर राजस्व में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं, तो राज्य अपने राजस्व लक्ष्यों के और करीब पहुंच सकता है। हालांकि, उधारी पर निर्भरता कम करना तेलंगाना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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