नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट यूजी) री-टेस्ट से पहले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम ने केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया है। यह मामला न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ के समक्ष रखा गया, जिन्होंने आज ही इस पर सुनवाई करने पर सहमति जताई है।
यह विवाद नीट यूजी पेपर लीक मामले के बाद सामने आया है, जिसके चलते प्रभावित उम्मीदवारों के लिए री-टेस्ट कराने का निर्णय लिया गया है। सरकार का कहना है कि परीक्षा की सुरक्षा और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए यह कदम जरूरी था।
जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी गई थी। सीबीआई के अनुसार, परीक्षा की गोपनीयता तब प्रभावित हुई जब प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही व्हाट्सऐप और टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर पीडीएफ फॉर्मेट में फैल गए थे।
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सरकारी अधिकारियों का मानना है कि री-टेस्ट से पहले किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगाई गई थी। यह प्रतिबंध सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2020 की धारा 69ए के तहत लगाया गया है और यह 22 जून तक सीमित अवधि के लिए लागू रहेगा।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने केंद्र सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। एनटीए ने कहा कि यह कदम मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
एनटीए के अनुसार, हाल के दिनों में कई टेलीग्राम चैनल ऐसे नामों से सक्रिय थे, जिनमें पेपर लीक और संगठित नकल गिरोह के संकेत मिलते थे। इनमें “पेपर लीक नीट”, “री-नीट 2026”, “प्राइवेट माफिया” और “री नीट माफिया” जैसे नाम शामिल थे।
टेलीग्राम ने अब इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए अदालत से राहत की मांग की है। वहीं, सरकार और शिक्षा मंत्रालय ने कहा है कि यह कदम भ्रामक जानकारी के प्रसार को रोकने और परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।
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