तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी अंदरूनी असंतोष के बीच पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की राजनीतिक चुनौतियां और बढ़ती दिखाई दे रही हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे के बाद अब कई टीएमसी सांसदों की गतिविधियों ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
सूत्रों के अनुसार, नई दिल्ली में टीएमसी के 11 लोकसभा सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। इस बैठक में सुवेंदु अधिकारी भी मौजूद बताए जा रहे हैं। हालांकि बैठक में क्या चर्चा हुई, इसे लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन इससे पार्टी के भीतर संभावित राजनीतिक पुनर्संरेखण की अटकलें तेज हो गई हैं।
बैठक में शामिल सांसदों में प्रसून बनर्जी (हावड़ा), शर्मिला सरकार (बर्धमान पूर्व), अरूप चक्रवर्ती (बांकुड़ा), कालीपद सोरेन (झाड़ग्राम), जगदीश चंद्र बसुनिया (कूचबिहार), काकोली घोष दस्तिदार (बारासात), पार्थ भौमिक (बैरकपुर), बापी हलदार (मथुरापुर), शताब्दी रॉय (बीरभूम), असित कुमार माल (बोलपुर) और जून मालिया (मेदिनीपुर) शामिल बताए जा रहे हैं।
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इस बीच, सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे ने भी राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। ममता बनर्जी को संबोधित अपने इस्तीफा पत्र में उन्होंने पार्टी पर भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ अत्याचार और प्रशासनिक विफलताओं के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने पश्चिम बंगाल में शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, रोजगार और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर भी चिंता व्यक्त की।
रॉय ने अपने पत्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की भी प्रशंसा करते हुए दावा किया कि राज्य के मतदाताओं ने पहली बार स्पष्ट जनादेश दिया है और नई सरकार विकास कार्यों पर तेजी से काम कर रही है।
उधर, ममता बनर्जी फिलहाल दिल्ली में INDIA गठबंधन की बैठकों में व्यस्त हैं, लेकिन टीएमसी के भीतर बढ़ता असंतोष उनके लिए नई राजनीतिक चुनौती बनता जा रहा है।
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