अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह किसी भी देश को कार्रवाई से पहले समयसीमा (डेडलाइन) देना पसंद नहीं करते। हालांकि उन्होंने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि "उन्हें ठीक तरह से व्यवहार करना चाहिए।" ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पश्चिम एशिया में दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई लगातार तेज हो रही है और दोनों पक्षों के बीच हुआ अस्थायी समझौता भी टूट चुका है।
पेंसिल्वेनिया डिफेंस एंड इनोवेशन समिट में शामिल होने पहुंचे ट्रंप से पूछा गया कि क्या उन्होंने ईरान में पुलों और अन्य ढांचों पर बमबारी का आदेश देने से पहले तेहरान को कोई अंतिम समयसीमा दी थी। इसके जवाब में उन्होंने कहा, "मुझे डेडलाइन देना पसंद नहीं है, लेकिन वे पूरी स्थिति जानते हैं। उन्हें संभलकर व्यवहार करना चाहिए।"
इससे पहले एक साक्षात्कार में ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान बातचीत की मेज पर वापस नहीं लौटता है तो अमेरिका उसके बिजली संयंत्रों और पुलों को निशाना बनाएगा। उन्होंने कहा था कि यदि समझौता नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में अमेरिकी हमले और अधिक तेज होंगे।
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ट्रंप ने यह भी कहा कि यदि ईरान ने अमेरिका के साथ समझौता नहीं किया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। उन्होंने कहा, "समझौता कर लो, नहीं तो तुम्हारे पास कुछ भी नहीं बचेगा।" हालांकि उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना नागरिकों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रख रही है और सैन्य कार्रवाई में आम लोगों को नुकसान से बचाने की कोशिश की जा रही है।
इस बीच एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच संपर्क अभी भी बना हुआ है। हालांकि ट्रंप प्रशासन का कहना है कि जब तक ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही में बाधा डालना बंद नहीं करता, तब तक वार्ता आगे नहीं बढ़ सकती।
सैन्य अभियान की अवधि को लेकर पूछे गए सवाल पर ट्रंप ने कहा कि हमले तब तक जारी रहेंगे, जब तक वह उन्हें रोकने का फैसला नहीं करते। उन्होंने ईरान में अमेरिकी जमीनी सेना भेजने की संभावना से भी पूरी तरह इनकार नहीं किया, लेकिन संकेत दिया कि फिलहाल अमेरिका अन्य विकल्पों को प्राथमिकता दे रहा है। ट्रंप के इन बयानों से साफ है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिलहाल कम होने के बजाय और बढ़ता दिखाई दे रहा है।
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