अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ वार्ता को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि ईरान बातचीत की मेज पर वापस आता है या नहीं। उनका यह बयान पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई वार्ता के विफल होने और ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी की घोषणा के बाद आया है।
मैरीलैंड स्थित जॉइंट बेस एंड्रयूज पर ट्रंप ने कहा, “अगर वे वापस आते हैं तो ठीक, नहीं आते तो भी मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।” उन्होंने ईरान पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर अपने वादों को पूरा न करने का आरोप भी लगाया।
ट्रंप ने दावा किया कि संघर्ष के दौरान ईरान की सैन्य क्षमता को बड़ा नुकसान हुआ है और उसकी मिसाइल तथा ड्रोन बनाने की क्षमता लगभग खत्म हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने संयम बरता, लेकिन ईरान ने अपने वादे तोड़े।
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इससे पहले, अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में करीब 21 घंटे तक चली वार्ता किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने किया, जिन्होंने कहा कि अमेरिका ने अपनी “अंतिम और सर्वोत्तम” पेशकश दी थी, लेकिन दोनों पक्ष सहमति नहीं बना सके। अमेरिका चाहता था कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने की गारंटी दे।
वहीं, ईरान ने वार्ता विफल होने के लिए अमेरिका की “अतार्किक मांगों” को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि समझौते के लिए अमेरिका को अपना “दबावपूर्ण रवैया” छोड़ना होगा।
वार्ता के विफल होने के बाद ट्रंप ने ईरान के सभी बंदरगाहों और तटीय इलाकों की नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा कर दी, जो आज से लागू होगी। इस कदम से मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ने तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
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