संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झटका देते हुए OPEC और OPEC+ जैसे प्रमुख तेल उत्पादक समूहों से अलग होने का ऐलान किया है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब ईरान युद्ध के कारण पहले ही दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहराया हुआ है और तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
यूएई ने स्पष्ट किया है कि यह कदम उसकी दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक नीति का हिस्सा है। देश अब अपने ऊर्जा उत्पादन और निवेश को स्वतंत्र रूप से संचालित करना चाहता है, जिससे उसे वैश्विक बाजार की मांग के अनुसार निर्णय लेने में अधिक लचीलापन मिलेगा। यह फैसला 1 मई से प्रभावी होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यूएई का यह कदम OPEC की एकता और प्रभाव को कमजोर कर सकता है। यह संगठन दशकों से तेल उत्पादन को नियंत्रित कर वैश्विक कीमतों को प्रभावित करता रहा है। यूएई जैसे बड़े उत्पादक देश के बाहर होने से संगठन के भीतर संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।
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वर्तमान में मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के कारण तेल आपूर्ति पहले ही प्रभावित है। ऐसे में यूएई का अलग होना वैश्विक बाजार में अस्थिरता को और बढ़ा सकता है। हालांकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इससे भविष्य में तेल उत्पादन बढ़ सकता है, जिससे कीमतों पर दबाव भी पड़ सकता है।
यूएई और सऊदी अरब के बीच हाल के वर्षों में आर्थिक और रणनीतिक मतभेद भी इस फैसले के पीछे एक कारण माने जा रहे हैं। कुल मिलाकर, यह कदम वैश्विक ऊर्जा राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जिसके दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं।
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