मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर फैली अफवाहों ने मुस्लिम परिवारों के बीच चिंता बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि निकाह के लिए रोजाना आने वाले आवेदनों की संख्या अचानक 30-40 से बढ़कर 200 से 250 तक पहुंच गई, जबकि कुछ दावों में यह संख्या करीब 300 तक बताई गई है।
इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह एक अफवाह बताई जा रही है। सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से यह चर्चा फैल गई कि यूसीसी लागू होने के बाद मुस्लिम समुदाय में रिश्तेदारों, खासकर चचेरे भाई-बहन के बीच होने वाली शादियों पर रोक लग जाएगी। इसके बाद जिन परिवारों ने कई महीने या साल पहले शादियां तय कर रखी थीं, वे भी जल्द से जल्द निकाह कराने के लिए काजी कार्यालयों का रुख करने लगे।
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड ने दी सफाई
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. संवर पटेल ने कहा कि यूसीसी की एक धारा को अधूरी जानकारी के साथ पेश किए जाने के कारण भ्रम की स्थिति बनी। उनके अनुसार, धारा 4(4) में धार्मिक रीति-रिवाज और परंपराओं के तहत होने वाले विवाह के लिए अपवाद का प्रावधान है।
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पटेल ने कहा कि यदि वर और वधू दोनों मुस्लिम हैं और उनकी स्थापित धार्मिक परंपरा किसी विशेष रिश्ते में विवाह की अनुमति देती है, तो उस प्रथा को इस प्रावधान के तहत मान्यता मिल सकती है। उन्होंने लोगों से कानून की पूरी जानकारी लेने की अपील की।
भोपाल के काजी ने भी अफवाह को बताया वजह
भोपाल के नायब शहर काजी मुफ्ती अली कादर ने कहा कि पहले रोजाना 30-40 आवेदन आते थे, लेकिन अफवाह फैलने के बाद यह संख्या बढ़कर करीब 200-250 हो गई। उन्होंने कहा कि परिवारों को गलत सूचना के कारण जल्दबाजी में निकाह कराने की चिंता हुई।
कई परिवारों ने शादी के लिए मैरिज हॉल, कैटरिंग और अन्य व्यवस्थाएं पहले से कर रखी थीं। ऐसे में उन्हें डर था कि नियम बदलने पर उनकी तैयारियां प्रभावित हो सकती हैं।
वक्फ बोर्ड और काजी कार्यालय लोगों को समझा रहे हैं कि मुस्लिमों में चचेरे भाई-बहन के विवाह पर पूर्ण प्रतिबंध की बात सही नहीं है। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर भरोसा न करने और कानून की वास्तविक जानकारी हासिल करने की अपील की है।
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