भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 को दीर्घकालिक दृष्टि के साथ तैयार किया जाना चाहिए, ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था को अधिक लचीला, आत्मनिर्भर और तेज़ी से बढ़ने वाला बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय “अत्यंत खतरनाक दौर” से गुजर रही है, ऐसे में भारत को अपनी आर्थिक रणनीति को दूरदर्शी बनाना होगा।
एक साक्षात्कार में राजन ने कहा कि पहले भारत में पंचवर्षीय योजनाएं हुआ करती थीं, लेकिन तब भी बजट का उनसे समुचित तालमेल नहीं होता था। उनके अनुसार, बजट को यह स्पष्ट करना चाहिए कि भारत कैसे एक मजबूत, स्वतंत्र और तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन सकता है, जिससे वैश्विक स्तर पर देश के साथ साझेदारी करने की इच्छा बढ़े।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को बजट पेश करेंगी। उम्मीद है कि इसमें अस्थिर वैश्विक भू-राजनीतिक हालात के बीच आर्थिक विकास को गति देने के लिए सुधारात्मक कदम शामिल होंगे। राजन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में हो रहे बड़े निवेश से अवसर तो हैं, लेकिन कुछ वैश्विक शक्तियों पर अत्यधिक निर्भरता भारत को कमजोर भी बना सकती है।
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उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बेहतर तरीके से खुद को जोड़ने की ज़रूरत है और इसके लिए शुल्क दरों में कटौती जैसे कदम अहम हो सकते हैं। साथ ही, राज्यों को भी निवेश-अनुकूल नीतियां अपनानी होंगी। भारत भले ही दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था हो, लेकिन पड़ोसी देशों—बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल—के साथ भी संबंध मजबूत करना ज़रूरी है।
राजन ने जोर दिया कि भारत को अस्थायी और असंतुलित विकास से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे और आवास परियोजनाओं में सोच-समझकर निवेश होना चाहिए, ताकि विकास टिकाऊ और दीर्घकालिक हो।
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