उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया। लखनऊ स्थित जन भवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस कैबिनेट विस्तार में कुल छह नेताओं को मंत्री बनाया गया है।
मंत्री पद की शपथ लेने वालों में पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, समाजवादी पार्टी से बगावत कर भाजपा के करीब आए मनोज कुमार पांडेय, कृष्णा पासवान, सुरेंद्र डिलेर, हंसराज विश्वकर्मा और कैलाश राजपूत शामिल हैं। इसके अलावा अजीत सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर को स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री के रूप में पदोन्नत किया गया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कैबिनेट विस्तार 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण साधने की कोशिश माना जा रहा है। भाजपा नेतृत्व अलग-अलग जातीय समूहों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देकर चुनावी आधार मजबूत करने में जुटा है।
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हालांकि, इस विस्तार को लेकर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश कैबिनेट में केवल छह पद खाली थे, जबकि अन्य दलों से भाजपा में आने वाले नेताओं की संख्या इससे कहीं अधिक है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भाजपा में शामिल होने वाले सभी नेताओं को मंत्री पद देकर पुरस्कृत किया जाएगा।
अखिलेश यादव ने भाजपा पर असंतुष्ट विधायकों और दल बदलकर आए नेताओं को साधने की राजनीति करने का आरोप लगाया। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि मंत्रिमंडल विस्तार पूरी तरह संगठन और सरकार की जरूरतों के आधार पर किया गया है।
राजनीतिक हलकों में इस विस्तार को आगामी चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। लेकिन भाजपा आने वाले समय में संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर बड़े बदलाव कर सकती है।
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