उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने पहली बार सभी 75 जिला पंचायत अध्यक्षों को उनके कार्यकाल की समाप्ति के बाद प्रशासक (एडमिनिस्ट्रेटर) नियुक्त करने का फैसला किया है। इसके तहत वे नई जिला पंचायतों के गठन तक अथवा अधिकतम छह महीने की अवधि तक अपने-अपने जिला पंचायतों का कार्यभार संभालते रहेंगे। यह फैसला मौजूदा जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल समाप्त होने से ठीक एक दिन पहले लिया गया।
शुक्रवार शाम जारी शासनादेश में राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारियों (डीएम) को अधिकार दिया है कि वे अपने-अपने जिले के मौजूदा जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक नियुक्त करें। आदेश के अनुसार, 12 जुलाई 2026 से ये अध्यक्ष प्रशासक के रूप में कार्य करेंगे और यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी, जब तक नई निर्वाचित जिला पंचायतों का गठन नहीं हो जाता या अधिकतम छह महीने पूरे नहीं हो जाते।
हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रशासक के रूप में नियुक्त जिला पंचायत अध्यक्ष केवल नियमित प्रशासनिक कार्य ही कर सकेंगे। उन्हें किसी भी प्रकार का नीतिगत निर्णय लेने की अनुमति नहीं होगी। यदि कोई नीतिगत या विशेष महत्व का मामला सामने आता है तो उसे संबंधित जिलाधिकारी के माध्यम से राज्य सरकार को भेजा जाएगा।
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उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में इस वर्ष स्थानीय निकाय चुनाव प्रस्तावित थे। इससे पहले 25 मई को राज्य सरकार ने ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को भी प्रशासक नियुक्त किया था। इस फैसले पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सरकार से सवाल पूछे थे।
शुक्रवार को भी इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा। न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजरी शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि पहले दिए गए न्यायालय के आदेश के बावजूद सरकार ने यह निर्णय किस आधार पर लिया। मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी।
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