अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को बड़ा कानूनी झटका लगा है। न्यूयॉर्क स्थित अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार अदालत ने ट्रंप द्वारा लगाए गए 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ को अवैध और कानून के दायरे से बाहर करार दिया है।
तीन न्यायाधीशों की पीठ ने 2-1 के बहुमत से दिए गए फैसले में कहा कि राष्ट्रपति को कांग्रेस द्वारा इतनी व्यापक टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं दी गई थी। अदालत ने इन टैरिफ को “अवैध” और “कानून द्वारा अधिकृत नहीं” बताया। यह फैसला उन छोटे कारोबारियों के पक्ष में आया जिन्होंने इन शुल्कों को अदालत में चुनौती दी थी।
हालांकि पीठ के एक न्यायाधीश ने असहमति जताते हुए कहा कि कानून राष्ट्रपति को व्यापार और टैरिफ के मामलों में व्यापक अधिकार देता है।
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यह मामला उन अस्थायी 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ से जुड़ा है, जिन्हें 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत लागू किया गया था। इससे पहले फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा लगभग सभी देशों पर लगाए गए भारी टैरिफ को रद्द कर दिया था। मौजूदा टैरिफ 24 जुलाई तक लागू रहने वाले थे।
यह फैसला फिलहाल केवल तीन याचिकाकर्ताओं — वॉशिंगटन राज्य, मसाला कंपनी बर्लैप एंड बैरल और खिलौना निर्माता बेसिक फन — पर सीधे लागू होगा। हालांकि कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अन्य कंपनियों पर इसका क्या असर पड़ेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
बेसिक फन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जे फोरमैन ने फैसले के बाद कहा, “हमने लड़ाई लड़ी और जीत हासिल की। हम बेहद उत्साहित हैं।”
पिछले वर्ष ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल करते हुए अमेरिका के व्यापार घाटे को राष्ट्रीय आपातकाल बताया था और इसी आधार पर व्यापक आयात शुल्क लगाए थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में कहा था कि यह कानून ऐसे टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं देता।
इसके बावजूद माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन नए रास्तों से फिर टैरिफ लागू करने की कोशिश कर सकता है। फिलहाल अमेरिका कई व्यापारिक जांच कर रहा है, जिनमें चीन, यूरोपीय संघ और जापान जैसे देशों की व्यापार नीतियों की समीक्षा शामिल है।
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