अमेरिका में बजट को लेकर जारी राजनीतिक टकराव के कारण अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) आंशिक रूप से बंद हो गया। इस बंदी का असर हजारों सरकारी कर्मचारियों पर पड़ेगा, जिनमें एयरपोर्ट सुरक्षा एजेंट से लेकर आपदा राहत से जुड़े अधिकारी शामिल हैं। फंडिंग पर सहमति बनने तक कई कर्मचारियों को जबरन छुट्टी पर भेजा जाएगा या उन्हें बिना वेतन के काम करना पड़ेगा।
यह विवाद मुख्य रूप से उस एजेंसी को लेकर है जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त आव्रजन नीति को लागू करती है। खास तौर पर इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) एजेंसी को लेकर डेमोक्रेट और रिपब्लिकन आमने-सामने हैं। मिनियापोलिस में छापेमारी के दौरान ICE एजेंटों द्वारा दो अमेरिकी नागरिकों की मौत के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद डेमोक्रेट्स ने एजेंसी के कामकाज में बड़े बदलाव की मांग की है।
डेमोक्रेट्स चाहते हैं कि ICE की गश्त सीमित की जाए, ऑपरेशन के दौरान एजेंटों के मास्क पहनने पर रोक लगे और निजी संपत्ति में प्रवेश के लिए न्यायिक वारंट अनिवार्य हो। उनका कहना है कि जब तक इन बदलावों पर सहमति नहीं बनती, तब तक DHS को अतिरिक्त फंडिंग नहीं दी जानी चाहिए। वहीं व्हाइट हाउस ने आरोप लगाया है कि विपक्ष राजनीतिक कारणों से सरकार को बंदी की ओर धकेल रहा है।
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हालांकि DHS के बंद होने के बावजूद ICE अपने पुराने बजट से काम जारी रखेगा। इस बंदी का सबसे ज्यादा असर फेडरल इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी (FEMA) और ट्रांसपोर्टेशन सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन (TSA) पर पड़ सकता है। TSA ने चेतावनी दी है कि लंबी बंदी से एयरपोर्ट पर लंबी कतारें और उड़ानों में देरी या रद्दीकरण हो सकता है।
यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की तीसरी सरकारी बंदी होगी। इससे पहले अक्टूबर-नवंबर में 43 दिन की रिकॉर्ड बंदी और इसी महीने चार दिन की आंशिक बंदी हो चुकी है। फिलहाल व्हाइट हाउस और डेमोक्रेट्स के बीच बातचीत ठप है और जल्द समाधान के संकेत नहीं दिख रहे।
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