अमेरिका और ईरान के बीच जारी तीन महीने के संघर्ष को लेकर एक अहम कूटनीतिक पहल सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार दोनों देश युद्धविराम को 60 दिनों के लिए बढ़ाने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने के लिए प्रारंभिक समझौते के करीब पहुंच गए हैं। हालांकि इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी जरूरी होगी।
सूत्रों के मुताबिक, यह संभावित समझौता उस समय सामने आया है जब दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। हाल ही में कुवैत ने दावा किया कि उसने ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया है। अमेरिकी सेना ने इस घटना को “सीजफायर का गंभीर उल्लंघन” बताया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि ईरान से दागी गई मिसाइलों और ड्रोनों को कुवैत की एयर डिफेंस ने रोक दिया। वहीं, कुवैत ने भी इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि उसकी सुरक्षा प्रणाली ने कई खतरों को निष्क्रिय किया।
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ईरान ने दावा किया कि उसने पहले अमेरिकी हमलों के जवाब में एक अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाया, हालांकि स्थान स्पष्ट नहीं किया गया। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने इस घटना को “खुली आक्रामकता” करार दिया।
इसके अलावा अमेरिका ने दावा किया कि उसने ईरान के दक्षिणी हिस्से में कई ड्रोन और उनके कंट्रोल स्टेशन को नष्ट किया है, खासकर बंदर अब्बास क्षेत्र के पास।
तनाव के बावजूद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत जारी है और पूर्ण युद्ध की स्थिति से बचने की कोशिश की जा रही है। राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि वार्ता में प्रगति हो रही है।
यह संघर्ष मध्य पूर्व की स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर बड़ा असर डाल रहा है। अमेरिका चाहता है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोले, जबकि ईरान आर्थिक प्रतिबंधों में राहत की मांग कर रहा है।
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