अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्षविराम वार्ता में पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका को लेकर अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पाकिस्तान की निष्पक्षता पर संदेह जताते हुए कहा कि इस्लामाबाद की भूमिका “समस्याग्रस्त” है, क्योंकि पाकिस्तान का इजराइल के प्रति लंबे समय से विरोधी रवैया रहा है।
लिंडसे ग्राहम की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिसमें पाकिस्तान से अब्राहम समझौते में शामिल होने की अपील की गई थी।
सीनेटर ग्राहम ने कहा कि पाकिस्तान की धरती पर ईरानी सैन्य विमानों को ठहराए जाने की खबरें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं की इजराइल विरोधी टिप्पणियां चिंताजनक हैं और इससे उसकी निष्पक्ष मध्यस्थता पर सवाल खड़े होते हैं। ग्राहम ने कहा कि पाकिस्तान को अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपील पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए कि वह अब्राहम समझौते में शामिल होगा या नहीं।
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दरअसल, अब्राहम समझौता वर्ष 2020 में डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य इजराइल और अरब देशों के बीच कूटनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंध स्थापित करना था। संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन इस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले पहले देश थे। बाद में मोरक्को और सूडान भी इसमें शामिल हुए।
डोनाल्ड ट्रंप अब पाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर, तुर्की और जॉर्डन जैसे मुस्लिम बहुल देशों को भी इस समझौते में शामिल करना चाहते हैं। हालांकि पाकिस्तान ने साफ कर दिया है कि वह किसी ऐसे समझौते का हिस्सा नहीं बनेगा, जो उसकी “मौलिक विचारधारा” के खिलाफ हो।
ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान 75 वर्षों से फिलिस्तीन के समर्थन में खड़ा है और जब तक पूर्वी येरुशलम को राजधानी बनाकर स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना नहीं होती, तब तक पाकिस्तान इजराइल को औपचारिक मान्यता नहीं देगा।
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