अमेरिका और ताइवान ने गुरुवार (15 जनवरी 2026) को एक बड़े व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत ताइवानी वस्तुओं पर लगने वाले आयात शुल्क (टैरिफ) में कटौती की जाएगी और इसके बदले ताइवान की कंपनियां अमेरिका के प्रौद्योगिकी क्षेत्र में 250 अरब डॉलर का निवेश करेंगी। यह समझौता राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पिछले वर्ष अप्रैल में घोषित व्यापक टैरिफ नीति के बाद किया गया ताजा सौदा है। इससे पहले अमेरिका यूरोपीय संघ और जापान के साथ भी इसी तरह के समझौते कर चुका है, जबकि चीन के साथ एक साल का व्यापार युद्धविराम लागू है।
शुरुआत में ट्रंप प्रशासन ने ताइवानी उत्पादों पर 32 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा था, जिसे बाद में 20 प्रतिशत किया गया। नए समझौते के तहत इसे घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है, जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र के अन्य अमेरिकी व्यापार साझेदारों जैसे जापान और दक्षिण कोरिया के बराबर है।
अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच “आर्थिक साझेदारी” स्थापित करेगा और अमेरिका में कई विश्वस्तरीय औद्योगिक पार्क बनाए जाएंगे, जिससे घरेलू उत्पादन, खासकर सेमीकंडक्टर क्षेत्र, को बढ़ावा मिलेगा। विभाग ने इसे अमेरिका के सेमीकंडक्टर उद्योग के बड़े पैमाने पर पुनर्स्थापन की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।
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ताइवान सरकार ने पुष्टि की कि द्वीप की कंपनियां सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अनुप्रयोगों और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में 250 अरब डॉलर का निवेश करेंगी। समझौते के तहत कुछ आयातों—जैसे सामान्य दवाएं और विमान पुर्जे—को टैरिफ से छूट मिलेगी। अमेरिका में निवेश करने वाले ताइवानी सेमीकंडक्टर निर्माताओं को विशेष रियायतें भी दी जाएंगी।
इस समझौते के ऐलान से एक दिन पहले चीन ने इसकी आलोचना करते हुए इसे अमेरिका द्वारा ताइवान का “आर्थिक शोषण” बताया। वहीं, दुनिया की सबसे बड़ी चिप निर्माता कंपनी टीएसएमसी (TSMC) ने भी इस मौके पर अपने निवेश बढ़ाने की घोषणा की। कंपनी ने AI की बढ़ती मांग के चलते मुनाफे और राजस्व में तेज उछाल दर्ज किया है और 2026 में पूंजीगत खर्च को 52–56 अरब डॉलर तक बढ़ाने की योजना बनाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित बाजार में टीएसएमसी की मजबूत स्थिति बनी रहेगी।
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