राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख और पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने बुधवार (4 फरवरी 2026) को कहा कि अमेरिका की नई टैरिफ नीति में ऐसे प्रावधान हैं, जिनसे अमेरिकी कृषि उत्पादों के भारत में निर्यात का रास्ता खुल सकता है और यह भारतीय किसानों के लिए चिंता का विषय है।
बारामती में पवार ने कहा कि हाल ही में हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की पूरी तस्वीर अगले दो दिनों में स्पष्ट हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने पहले भारत पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया था, जिसमें रूस से तेल खरीदने पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क भी शामिल था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 फरवरी 2026 को कहा था कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता हो गया है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुशी जताते हुए कहा था कि अब “मेक इन इंडिया” उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है।
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टैरिफ के मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए शरद पवार ने कहा कि अमेरिका द्वारा घोषित समझौते में कृषि निर्यात की अनुमति का प्रावधान भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए चिंता पैदा करता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका एक शक्तिशाली अर्थव्यवस्था है और वहां से बड़े पैमाने पर कृषि निर्यात होने पर अन्य देशों के स्थानीय उत्पादकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत सरकार कृषि क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका से ऊर्जा, परिवहन और कृषि उत्पादों की 500 अरब डॉलर की खरीद का वादा किया है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत पर अमेरिकी टैरिफ अब 18 प्रतिशत होगा, जबकि भारत में अमेरिकी निर्यात पर 0 प्रतिशत टैरिफ लगेगा।
शरद पवार ने पारिवारिक त्रासदी के कारण बजट सत्र में शामिल न हो पाने का भी जिक्र किया और कहा कि बजट में आम लोगों पर बोझ बढ़ाने वाले कदमों से बचा गया है, लेकिन विकास के लिए और ठोस उपायों की उम्मीद थी।
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