पर्यटन के लिए मशहूर पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में सड़क हादसों और उनसे होने वाली मौतों का आंकड़ा लगातार चिंता बढ़ा रहा है। इस साल के पहले सात महीनों में राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में 775 लोगों की मौत हुई है। वर्ष 2025 में पूरे साल 1,285 लोगों ने सड़क हादसों में जान गंवाई थी। मौजूदा आंकड़ों को देखते हुए इस साल के अंत तक स्थिति और गंभीर होने की आशंका है।
उत्तराखंड के 13 जिलों में देहरादून, ऊधम सिंह नगर, नैनीताल और हरिद्वार में सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं और मौतें दर्ज की गई हैं। आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2025 से जुलाई 2026 के बीच देहरादून में 264, ऊधम सिंह नगर में 342, हरिद्वार में 362 और नैनीताल में 196 मौतें हुईं।
पहाड़ी इलाकों में लंबे समय तक बिना ब्रेक वाहन चलाना, तेज रफ्तार, ओवरलोडिंग, गलत तरीके से ओवरटेक करना और अनिवार्य ‘हिल ड्राइविंग’ लाइसेंस के बिना पहाड़ी सड़कों पर वाहन चलाना प्रमुख कारणों में शामिल हैं। इसके अलावा गड्ढे, कई स्थानों पर क्रैश बैरियर की कमी और रात में ड्राइविंग भी दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ाती है।
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गलत दिशा में वाहन चलाना, नशे में ड्राइविंग, लापरवाही, वाहनों का खराब रखरखाव, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाना और नो-पार्किंग जोन में वाहन खड़ा करना भी हादसों की प्रमुख वजहें हैं।
राज्य में दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सरकार करीब 800 करोड़ रुपये के बजट से सुरक्षा उपाय कर रही है। दुर्घटना संभावित 179 ब्लैक स्पॉट में से 169 पर सुधार कार्य पूरा हो चुका है। पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में क्रैश बैरियर लगाए जा रहे हैं और खतरनाक स्थानों की मैपिंग तथा नई तकनीक के इस्तेमाल की योजना है।
उत्तराखंड परिवहन विभाग के उप आयुक्त शैलेश तिवारी ने कहा कि तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाना हादसों के प्रमुख कारण हैं। गलत दिशा में वाहन चलाने वालों के खिलाफ चालान किए जा रहे हैं और उल्लंघन पकड़ने के लिए सड़कों पर हाई-स्पीड कैमरे लगाए गए हैं।
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