स्विट्ज़रलैंड के दावोस में चल रहे विश्व आर्थिक मंच (WEF) में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति और भू-रणनीति से जुड़े बड़े मुद्दों पर अपने विचार रखे। गुरुवार (22 जनवरी 2026) को ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और संबंधित पक्षों के बीच समझौते पर बातचीत अब भी जारी है। उन्होंने मंच से यह भी दोहराया कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए बेहद अहम है।
डावोस में ट्रंप ने “बोर्ड ऑफ पीस” के चार्टर पर हस्ताक्षर किए, जिसे उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के समाधान के लिए बनाई गई एक नई संस्था बताया। इस मौके पर व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा, “बधाई हो राष्ट्रपति ट्रंप, अब चार्टर पूरी तरह प्रभावी हो गया है और बोर्ड ऑफ पीस एक आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय संगठन बन चुका है।”
अब तक जिन देशों ने ट्रंप के निमंत्रण को स्वीकार किया है, उनमें अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अज़रबैजान, बहरीन, बेलारूस, मिस्र, हंगरी, कज़ाखस्तान, मोरक्को, पाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात और वियतनाम शामिल हैं। वहीं चीन, जर्मनी, इटली, पैराग्वे, रूस, स्लोवेनिया, तुर्की और यूक्रेन जैसे कई देशों ने अभी इस प्रस्ताव पर कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है।
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अपने संबोधन में ट्रंप ने अमेरिका को दुनिया का “आर्थिक इंजन” बताते हुए यूरोप की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यूरोप “सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा” है। छह साल बाद पहली बार WEF में लौटे ट्रंप के भाषण को सुनने के लिए दुनिया भर के राजनीतिक और कारोबारी नेता एक घंटे से अधिक समय तक कतार में खड़े रहे।
इससे पहले दिन में भारत के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि केवल बड़े लैंग्वेज मॉडल (LLM) तैयार करना ही किसी देश को भू-राजनीतिक बढ़त नहीं देता। उन्होंने जोर देकर कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता में किए जा रहे भारी निवेश का वास्तविक लाभ उन देशों को मिलेगा, जो इन तकनीकों को व्यावहारिक और लाभकारी तरीके से लागू कर पाएंगे।
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